Monthly Archives: January 2018

  • अनुत्तरित प्रश्न

    अनुत्तरित प्रश्न

    स्नेहा और स्निग्धा बचपन में साथ पढ़ी थीं. कई सालों बाद आज वे एक लेखक सेमीनार में मिली थीं. स्नेहा डॉक्टर बन गई थी, स्निग्धा इंजीनियर. लेखन के उन्मुक्त गगन में डिग्रियां कहीं आड़े नहीं आतीं....

  • गज़ल

    गज़ल

    ये रात बिन तेरे बड़ी काली नज़र आई तू मिला तो सुबह की लाली नज़र आई ========================== इश्क हो चाहे वफा हो या सुकून-ए-दिल हर शै तुम्हारे दर की सवाली नज़र आई ========================== वीरां थी बस्ती-ए-दिल...


  • ठगी

    ठगी

    यूँ तो लगभग सभी पर्यटन स्थलों पर श्वेत मोती , रंगीन मोती की माला , लकड़ी के समान , चाभी रिंग , मूर्ति पत्थरों पर , चावल पर नाम लिखने वालों की एक सी भीड़ होती...

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    01. मेरा है , मेरा है , सब मेरा है इसको निकालो उसको बसाओ धरा रहा सब धरा पै बंद हुई पलकें अनेकानेक कहानियाँ इति हुई लील जाती रश्मियाँ पत्तों पै बूँदें तब भी न क्षणभंगुर...

  • गजल

    गजल

    दुश्मन बने हुए हैं चेहरे बड़े चमन के। शायद बदल न पायें हालात इस वतन के।। शामिल रहे कभी जो निर्दोष के लहू में। संसद में घुस गए हैं नेता हमारे बन के।। जिन पर यकीं...

  • मोहन का बछड़ा

    मोहन का बछड़ा

    मोहन अपना छोटा बछड़ा,  एक दिवस ले खेत गया,  इधर-उधर वह लगा खेलने, खेलते-खेलते चौंक गया. मक्खी एक बड़ी तेजी से, भाग रही, मोहन बोला, ”मक्खी रानी, क्यों भगती हो, किससे डर है तुम्हें भला?” मक्खी...


  • तू भी बेवफ़ा निकला

    तू भी बेवफ़ा निकला

    बड़ी हसरत से आए थे, मिलने को ऐ दोस्त, सारी दुनिया की तरह, तू भी बेवफ़ा निकला. अब तक तो न कहीं भी, वफा का सिला मिला, तुझसे भी ऐ दोस्त, गिला-ही-गिला मिला. रहती यहां सदा...