रचनाकारों,का सम्मान

माँ सरस्वती सब को सुबुद्धि दे !! मेरा यह सन्देश मेरे सभी मित्रों और विशेषकर जय विजय से जुड़े रचनाकारों के लिए है,
माता सरस्वती के चरणों में नमन करते हुए कहना चाहता हूँ कि लखनऊ के मणि प्रकाशन के संतोष निर्मल के साथ मेरा बहुत ही दुखी अनुभव हुआ है, क्यों लोग ऐसा करते हैं? वो भी उनके साथ जो निस्वार्थ भाव से केवल अपनी रचनाएँ इन्हे छापने के लिए देतें हैं, उनसे कुछ नहीं लेते और सहयोग राशि भी देते हैं, कोई उम्र भी लिहाज नहीं है, झूठ पे झूठ बोल रहें हैं, मैंने सितम्बर २०१६, इनके ही आमंत्रण पर अपनी कुछ रचनाएँ , सहयोग राशि १०००/- साथ भेजी जिन्हे यह काव्य संग्रह में छापने वाले थे, बार बार पूछने पर गोल मोल जवाब देते थे, अब तो फ़ोन भी नहीं उठाते, एक बार पहले फ़ोन पर बात हुई तो बताया की इनके पुत्र ludhiana आ रहे हैं उनके हाथ पुस्तके भेज दी हैं एक महीने से अधिक हो गया पर पुस्तके नहीं आई, बार बार झूठ मूठ का बहाना बना रहे हैं, प्रभु की कृपा से , मैं एक बहुत अच्छी नौकरी और वेतन पर कार्य रत हूँ, आज तक अपने लेखन से एक पैसा भी नहीं कमाया. केवल निस्वार्थ भाव से अपनी रचनाएँ औरों तक पहुंचाता हूँ,और सरस्वती माँ की उपासना समझता हूँ, किसी भी पत्रिका में कविता, लेख छपने पर कभी एक पैसा भी नहीं लिया और सहयोग राशि के एवज़ में , जो पुस्तके प्राप्त हुई, उन्हें भी मित्रों में भेंट कर दी हैं, इसलिए इस सज्जन के ऐसे व्यवहार से मन बहुत दुखी हो रहा है. जो लोग रचनाकारों,का सम्मान नहीं कर सकते न करें पर उनका यूं मज़ाक न उड़ाएं . उनसे झूठ न बोले, कोई परेशानी हैं तो खुल कर बताएं पर ऐसे किसी का दिल न दुखाएं कवि मन से बहुत ही संवेदन शील होते हैं, और विश्वास टूटने पर गहरी चोट लगती है, भगवान ऐसे लोगो को सुबुद्धि दे, ….. , धन्यवाद .

परिचय - जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845