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काव्य सभा व सम्मान समारोह

8 जनवरी 2018, दिन सोमवार, विश्वपुस्तक मेला, प्रगति मैदान के लेखक मंच से लखनऊ के काव्या सतत साहित्य यात्रा समूह के तत्वावधान में काव्यसभा व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समूह की अध्यक्ष निवेदिता श्रीवास्तव ने वर्ष 2017 का सम्मानित “शारदेय रत्न” पुरस्कार नवागत श्रेणी में श्रीमती प्रतिमा प्रधान व वरिष्ठ साहित्यकार की श्रेणी में श्री मुकेश मिश्र जी को प्रदान किया।
तत्पश्चात काव्यसभा विख्यात साहित्यकार सुरजीत सिंह “जोबन” की अध्यक्षता में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें मुम्बई से पधारी चित्रा देसाई मुख्य अतिथि व राजस्थान की लौह महिला के नाम से विख्यात मशहूर रचनाकार आशा पाण्डेय ओझा विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर शोभायमान थीं।
शारदेय रत्न से अलंकृत मुकेश मिस्र ने “शिल्प कथ्य आदि का अभाव हो रहा प्रतीत” कह चिंता जतायी, तो प्रतिमा प्रधान ने “हँसेंगे हँसाएंगे चलते ही जाएँगे” से जीवन जीने का मंत्र दिया।
अजय चौहान “न चिट्ठी न तार”, दीप्ति भारती “बहुत हुआ अब रोना गाना”, सचिन मेहरोत्रा “जुबाँ पर आज भी ताले नहीं”, ज्योत्स्ना सिंह “एक बार फिर से मंथन करना होगा”, रोली शंकर “तुम हरियाली दूब बनो”, बीना राघव”वर्षा ज्ञानामृत हुई”, निर्देश निधि “सुनो कृष्ण”,
नीलिमा शर्मा” “, निवेदिता मिश्रा झा” अभी विदा मत करो अपने खुश रहने की वजहों को”, निवेदिता दिनकर “अनामिका रहो, सदा डटे वहीं”, अनिल पराशर “तेरे झूठ पर भी भरोसा करूँगा”, नमिता राकेश “वो एक ऐसी किताब रखता है”, कल्पना मनोरमा “सुनो तथागत” सुनाकर श्रोताओं को रसमग्न कर दिया।
आशा पांडेय ओझा ने “मन मीरा तन राधिका” के साथ अपनी बात शुरू की। चित्रा देसाई ने निर्भया के लिए “छोटी सी थी” शीर्षक से कविता समर्पित की। सुरजीत सिंह का अध्यक्षीय काव्यपाठ भी बेटियों को समर्पित था।
एक अत्यन्त भव्य व सफल काव्यसभा के लिए काव्या परिवार बधाई का पात्र है।