गीतिका/ग़ज़लपद्य साहित्य

ग़ज़ल

(१)

राजा’ मंत्री हुआ करे कोई
जनता’ से तो वफ़ा करे कोई |
बात सबको खरी खरी बोलूँ
द्वेष हो तो जला करे कोई |
दिल्लगी तो कभी नहीं करता
मर्जी’ उनकी हँसा करे कोई |
राह कानून की नहीं आसां
वीर उसपर चला करे कोई |
संत कानून से नहीं डरते
विधि के’ रक्षक डरा करे कोई |
जीत कर वो चुनाव, लुप्त हुए
हैं कहाँ वो, पता करे कोई |
हों बड़े छोटे’ फर्क कोई’ नहीं
आम जन की दवा करे कोई |
जिब्ह बकरे’ की आज होना है
नेक मुल्ला दुआ करे कोई |
बोलते बोलते नहीं थकते
“काली’” की अब सूना करे कोई |
(२)
लीक से हट नया करे कोई
रूढ़ि को अब विदा करे कोई |
पाप का वो घडा भरा है अब
बकरे’ की माँ दुआ करे कोई |
माँगता है रहम सभी पापी
हो इनायत खुदा करे कोई |
तल्ख़ बातें न बोलना तू’ कभी
बोले’ कोई सूना करे कोई |
बेसहारा निरीह को फाँसा
दींन हीन और क्या करे कोई |
अब भरोसा नहीं रहा किसी’पर
क्या किसी से गिला करे कोई ?
कामना आदमी से’ क्या “काली”
ऐ खुदा ! तू हाज़त रवां* करे कोई |

शब्दार्थ : हाज़त रवां – इच्छा पूर्ति
कालीपद ‘प्रसाद’

*कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अँधेरे से उजाले की ओर " २०१६ प्रकाशित हुआ है | एक और कविता संग्रह ,एक उपन्यास प्रकाशन के लिए तैयार है !