हमसफर

पुलकित हो झूम जाती हूँ ,
अक्स तेरा चहुँ ओर पाती हूँ ।
मैं हूँ कागज तुम मेरी पाती हो ,
तुम से ही तो जीवन पाती हूँ ।

अधरों पर हैं गीत मिलन के ,
दिल में तन्हाई रहती है ।
मैं हूँ जीवन तुम धड़कन हो ,
मनमीत तुम्हें ही पाती हूँ ।

उर में बसाई है छवि तेरी ,
छंद में ज्यूँ लय रहती है ।
मैं हूँ खुशबू उपवन की ,
तुम में ही तो खो जाती हूँ।

जीवन है एक जिम्मेदारी ,
सार है जीवन का दुनियादारी ।
उम्मीदों के रेतीले पनघट पर ,
राह तुम्हारी ही तकती हूं ।

जीवन है एक कश्ती जैसा ,
बिन नाविक के पार नहीं ।
गाड़ी का एक पहिया हूँ मैं ,
दूजा तुम्हें ही पाती हूँ ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन