गीत – क्यों ऊसर जमीन पर मैंने

क्यों ऊसर जमीन पर मैंने, आशाओं के बीज बहाए ?
मायामय कुरंग के पीछे, क्यों मन के तुरंग दौड़ाए ?

घोर अमा थी ,तम गहरा था ।
उर पट पे भय का पहरा था ।
क्यों ऐसी विपरीत दशा में
विधु दर्शन को मन ठहरा था ।

हाय भला इस हठी हृदय के,बहकावे में हम क्यों आये ?
क्यों ऊसर……………………………………………

फिर बसंत सेमल बौराए।
डाल डाल पे कुसुम सुहाए ।
देख अरुण शोभा फूलों की,
दूर- दूर से पक्षी आये ।

गंध ,स्वाद से मुक्त पुष्प को देख,बहुत ही खग पछताये ।
क्यों ऊसर………………………………………..

आस्तीन का साँप आदमी ।
पाप से बड़ा पाप आदमी ।
सारे जीव चर अचर व्याकुल,
सिद्ध हुआ अभिशाप आदमी ।

विध्वंसक इंसान देखकर, नित्य यह धरा अश्रु बहाये ।
क्यों ऊसर ………………………………………

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।