मन नहीं करता

उठने का मन नहीं करता
बिस्तर का दामन छोडऩे का
मन नहीं करता।
क्योंकि जानता यह दिल और दिमाग
अगर उठ गया तो होगा वहीं
जो आज तक होता आया है।
सुननी पडेगी वहीं खबरें
जिनमें होगा अपराध ही अपराध।
रोज़ की तरह
विवादों से भरे होंगे अखबार।

देखने मिलेंगे वहीं चेहरे
जिनके पीछे छिपे होंगे गहरे राज़।
करनी पडेंगी वहीं बाते
जिनसे नहीं हो किसी का अपमान।
करने पड़ेंगे किताबों से भी
दो-दो हाथ।
जो सवार सकती है
हमारा कल और आज।
घोटना पडेगा गला
अपने हूनर का हर बार
क्योंकि कुछ लोग के लिए
है यह एकदम बेकार।
झेलना पड़ेगा उन्हीं
भारी बस्तो का भार।
सुनने पडेंगे वही ताने
जिनसे होगा दिल बेहाल।
अपनो के ही हाथों घोपी जाएगी
विश्वासघात की तलवार।
ज़िन्दगी की राह में
होगा यही हर बार।

श्रीयांश गुप्ता

परिचय - श्रीयांश गुप्ता

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