कविता – ये स्वप्न तू कह दे कि ये झूठ है

ये स्वप्न तू कह दे कि ये झूठ है
ठिठौलिया थी उनकी रुसवाई में

मत दस्तक दें रात के सन्नाटों में
बड़ी तकलीफ होती है तन्हाई में

वो आत्मा मेरे चिर का लिबाज है
कैसे जी पाउँगा उनकी जुदाई में

ये स्वप्न तू कह दे कि ये झूठ है
ठिठौलिया थीं उनकी रुसवाई में

भोर तो होने दे काली रातो का
सूत दिखा दूंगा उनकी कलाई में

नासिकाओं में प्रवाहित है वो मेरे
इलजमात लगे जिसपे बेवफाई के

ये स्वप्न तू कह दे कि ये झूठ है
ठिठौलिया थीं उनकी रुसवाई में

हाँ बदलने का ख्याल आया होगा
जो शौक़ होता है हर तरुणाई में

यकीं कर ले ये अंधेरों के मेहमान
बिखर जाएगी वो इस हँसाई में

ये स्वप्न तू कह दे कि ये झूठ है
ठिठौलिया थीं उनकी रुसवाई में

कैसे कह सकते हो सुरो ने समां बांधा
गदेलियाँ खुजलाती है उनकी जमाईं में

चले जाओ  चांदनी संग हमेशा को
वरना तपना होगा धूप की सुनवाई में

संदीप चतुर्वेदी  “संघर्ष”

परिचय - संदीप चतुर्वेदी "संघर्ष"

s/o श्री हरकिशोर चतुर्वेदी निवास -- मूसानगर अतर्रा - बांदा ( उत्तर प्रदेश ) कार्य -- एक प्राइवेट स्कूल संचालक ( s s कान्वेंट स्कूल ) विशेष -- आकाशवाणी छतरपुर में काव्य पाठ मो. 75665 01631