गीत/नवगीत

“मानव छंद”

रे माँ तेरे चरणों में, सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में, मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती, तेरे नैनों की धारा दुख के बादल दूर रहें, पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता, तेरा लाल निराला है अमृत बूंदे मिल जाती, सम्यक स्वाद निवाला है॥ खाकर मीठी थपकी को, मधुरम प्याला भर लेता […]

मुक्तक/दोहा

“दोहा”

उड़े तिरंगा शान से, लहराए जस फूल हरित केशरी चक्र बिच, शुभ्र रंग अनुकूल।।-1 झंडा डंडे से बँधा, मानवता की डोर काश्मीर जिसकी सिखा, क न्याकुमारी छोर।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

सामाजिक

लेख– बजट में क्या बहुरेंगे किसान और बेरोजगारों के अच्छे दिन?

एक कहावत है, उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, वर्तमान में खेती भी खतरे से खाली नहीं है। कुशल जीवन व्यतीत करने की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा, और मकान होता है। आजादी के समय से इन समस्याओं को उड़न- छू करने की तमाम योजनाएं चलाई गई, लेकिन गरीबी बढ़ती गई। गरीबी उन्मूलन पर कार्य करने वाली […]

कविता

सृजन

नहीं आसान   धरती में दबे रह कर खोल से आना बाहर अँकुर का, नींव को पाट कर निर्माण करना इक नई छत का नहीं आसान….. दिन रात का मंथन बताता मर्म जीवन का गर्भ में रख शिशु को करना पोषण सहना प्रसव पीड़ा, मिलना नया जीवन नहीं आसान…. प्रेम का अंकुर अश्रु सें सिंचता […]

राजनीति

क्या भंसाली निर्दोष हैं?

26 जनवरी 2018, देश का 69 वाँ गणतंत्र दिवस, भारतीय इतिहास में पहली बार दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित, पूरे देश के लिए गौरव का पल, लेकिन अखबारों की हेडलाइन क्या थीं? समारोह की तैयारियाँ? विदेशी मेहमानों का आगमन और स्वागत? जी नहीं ! “देश भर में पद्मावत के विरोध में हिंसक प्रदर्शन”! […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

जीवन मृत्यु रहस्य एवं आनन्दमय मोक्ष प्राप्ति की चर्चा

ओ३म् मनुष्य जीवन हो या पशु-पक्षियों का जीवन, सभी का जीवन, जीवन व मृत्यु के पाश में बन्धा व फंसा हुआ है। कोई भी मनुष्य या प्राणी स्वेच्छा से मरना नहीं चाहता। वह चाहता है कि वह सदा इसी प्रकार से बना रहे। उसे कभी कोई रोग न हो। दुःखों को कोई भी प्राणी पसन्द […]

राजनीति

लेख– उत्तम प्रदेश बनने की राह पर तो नहीं दिखता उत्तर प्रदेश

बड़ी उम्मीद के साथ उम्मीदों से भरे प्रदेश की जनता ने भाजपा का कमल बीते वर्ष खिलाया होगा, क्योंकि पिछले सपा सरकार के राजनीतिक कार्यकाल में सूबे की अवाम भ्रष्टाचार, लूट, अव्यवस्था, औरतों के साथ बदसुलूकी, किसानों की समस्याओं और बिजली वितरण में सरकारी भेदभाव से पीड़ित हो चुकी थी। किसी सरकार से तत्काल यह […]

बाल कविता

एकता में बल है

एक पेड़ पर रहता था, गौरैया का सुंदर जोड़ा, थोड़ा-सा वो समझदार था, अलबेला था थोड़ा-थोड़ा. सोचा इक दिन गौरैया ने, बन जाता जो एक घोंसला, हम भी सुख से रह सकते तो, होता हमको खूब हौसला. नदी किनारे एक पेड़ पर, गए बनाने अपना घर, देखा खूब पक्षियों को तो, भागे झट से घबराकर. […]

कविता

चाची को मूंछें होती तो

पान चबाकर पीकों से, चाचा होंठ किये हैं लाल। दाढ़ी संग है मूंछ मुड़ाये, चाचा के हैं चिकने गाल।। चाचा वाला रुप नहीं जब, चाचा क्योंकर कहता मैं। चाची को मूंछें होती तो, चाचा उनको कहता मैं।। चेहरे पर हैं क्रीम लगाते, जुल्फें लहराकर चलते। नाखून बढ़ाया हाथों का, पालिस लगाया करते हैं।। उनसे अच्छी […]