Monthly Archives: January 2018

  • “मानव छंद”

    “मानव छंद”

    रे माँ तेरे चरणों में, सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में, मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती, तेरे नैनों की धारा दुख के बादल दूर रहें, पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता, तेरा...

  • “दोहा”

    “दोहा”

    उड़े तिरंगा शान से, लहराए जस फूल हरित केशरी चक्र बिच, शुभ्र रंग अनुकूल।।-1 झंडा डंडे से बँधा, मानवता की डोर काश्मीर जिसकी सिखा, क न्याकुमारी छोर।।-2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी


  • सृजन

    सृजन

    नहीं आसान   धरती में दबे रह कर खोल से आना बाहर अँकुर का, नींव को पाट कर निर्माण करना इक नई छत का नहीं आसान….. दिन रात का मंथन बताता मर्म जीवन का गर्भ में...

  • क्या भंसाली निर्दोष हैं?

    क्या भंसाली निर्दोष हैं?

    26 जनवरी 2018, देश का 69 वाँ गणतंत्र दिवस, भारतीय इतिहास में पहली बार दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित, पूरे देश के लिए गौरव का पल, लेकिन अखबारों की हेडलाइन...



  • एकता में बल है

    एकता में बल है

    एक पेड़ पर रहता था, गौरैया का सुंदर जोड़ा, थोड़ा-सा वो समझदार था, अलबेला था थोड़ा-थोड़ा. सोचा इक दिन गौरैया ने, बन जाता जो एक घोंसला, हम भी सुख से रह सकते तो, होता हमको खूब...