कहानी

कहानी – कर्नल सा’ब

धरमिंदर शर्मा एक गरीब परिवार से थे । परिवार में पांच भाई थे । पिता गुलाम भारत के अंग्रेजी राज्य में सेना में सिपाही थे । परिवार के थोड़े से वेतन में सात सदस्यों का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था । धरमिंदर के सभी भाई पढ़ने में होशियार थे । सरकारी स्कूलों में पढ़कर […]

सामाजिक

नारी अब अबला नहीें

किसी देश की तरक्की में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। परिवार को संभालने वाली महिला अब समाज और देश को नई दिशा दे रही हैं। ये सिलसिला आजादी के बाद से अब तक अनवरत चल रहा है। पुरुषों से कमतर समझे जाने वाली महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, मेडिकल और सेना जैसे क्षेत्र […]

ब्लॉग/परिचर्चा

सदाबहार काव्यालय-18

गीत नए वर्ष का संदेशा नई उमंगें नई तरंगें, वर्ष नया ले आया है सभी सुखी हों सब सम्पन्न हों, यह संदेशा लाया है-   नए वर्ष में नई पहल हो, जीवन सुगम-सरल अपना अनसुलझी जो रही पहेली, वह सुलझे न रहे सपना प्यारे-प्यारे सपन सलोने वर्ष नया ले आया है सभी सुखी हों सब […]

लघुकथा

नई भोर की ओर

रोज़ सुबह छोटू को गोद में उठाकर ग्राहकों को दूध देने जाना कमली का रोज़ का नियम था. हमेशा की तरह आज भी सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर कजरी का दूध चुआ. बहुत दिनों बाद आज कजरी ने जी भरकर दूध दिया था. कल शाम कमली ने खुद भी जी भरकर खाना खाया था और कजरी […]

लघुकथा

सुविधा सुमार

“देखो भाया! मैं ठहरा बनिया…। लेना-देना हमारा व्यापार है… मैंने आपका साल भर से बंद पड़ी स्कूटी ठीक करवा देने में मदद की… बरोबर… है न?” “बिल्कुल ठीक कहा आपने । आप बड़ा काम करवा दिए…” “अब हिसाब बराबर करने का है” “ले आइये ढ़ेर सारा मिठाई… मिठाई से कर्जा थोड़ा उतर जाए…” “अरे नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

“गज़ल”

प्यार तुमसे जताती रही रात भर जाग सपने सजाती रही रात भर तुम न आए बहुत बेसहुर से लगे मौन महफिल नचाती रही रात भर॥ बेरहम थी शमा आग बढ़ती गई लौ जली को बुझाती रही रात भर॥ तक रही थी लिए पीर परछाइयाँ धुन्ध छायी हटाती रही रात भर॥ ठंड लगने लगी जब बदन […]

कहानी

“यादों के झरोखों से”

“यादों के झरोखों से” समय आकर निकल जाता है और हम नए कलेवर में प्रतिदिन न जाने कितने रंगों मे खुद को रंगा हुआ पाते हैं, किसने रंगा, कब रंगा और क्यों रंगा यह तो तब पता चलता है जब या तो आईना हमारे पास आता है या हम खुद आईने के पास जाते हैं। […]

कविता

” चौपाई, श्रृंगार रस”

मुरली हाथ गले मह माला, पितांबर सोहे गोपाला मोर पंख मुकुट नंदलाला, चैन चुरा जाए बृजबाला।।-1 मातु यशोमति भवन अटारी, हर्षित हृदय सुखी महतारी गोकुल की सब गैया न्यारी, ग्वाल बाल सब हुए सुखारी।।-2 लखि राधे की नरम कलाई, चुड़िया बेचन चले कन्हाई बरसाने की गली निराई, तब मुरली ने राग बजाई।।-3 सज धज राधे […]

कविता

ज़िंदगी

एक हसीन तोहफा है जिंदगी। फूल बनकर मुस्कुराना, मुस्कुरा कर गम भुलाना है जिंदगी। माँ का प्यार, यारो की यारी है जिंदगी। हार को जीत मे बदलना या नामुमकिन को मुमकिन मे बदलना है जिंदगी। एक वरदान है जिंदगी, एक अरमान है जिंदगी, उस खुदा का एक अहसान है जिंदगी। – श्रीयांश गुप्ता

गीत/नवगीत

नव वर्ष का भोर

नव वर्ष का भोर आया है नये खग- कल गान लाया है धरा पे मधुर मकरन्द छाया है पुष्पित फूलों ने एक हार बनाया है। नव वर्ष का – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – वहक़ रही है सव अन्तर धड़कन झूम […]