Monthly Archives: February 2018

  • सुन रहा आसमां

    सुन रहा आसमां

    वाचिक स्रग्विणी छंद ============= सुन रही है जमीं, सुन रहा आसमां। प्रेम की बात को, बुन रहा आसमां।। तुम चली हो किधर, आ जरा इस डगर। राह कांटे इधर, चुन रहा आसमां।। ना लडो इस समय,...



  • दोहे

    दोहे

    १- गले मिलें हम भूलकर ,सारे कलुषित राग । बैर जला दें हम सभी ,हो होली की आग ।। २- मारें रंग फुहार की ,कर दें चूनर लाल। इस होली में रंग दें ,गोरी तेरे गाल...

  • जज्बात

    जज्बात

    कुछ अपने अपने होकर भी गैर हो जाते हैं रिश्तों के सुर्ख जज्बात फीके रंग बिखरते हैं एक खूबसूरत अपनत्व जो कभी महका करता था जज्बातों के खुशबू से आज, बदलते रिश्तों की मानसिकता उसमें डूबा...

  • होली

    होली

    न या पिचकारी न वा पिचकारी होली म अबकी चलइबे दुधारी खाली तिजोरी पीएनबी की करिगें सगल बोझ मोदी के काँधें म धरिगें सफाई के अभियान के बनिगें अगुवा रंगारंग खुद होइके नीरव निकरिगें बड़े बोल...


  • समास

    समास

    दो या दो से अधिक शब्दों का, मेल समास कहलाता है, इससे बना नया शब्द ही, ‘समस्त पद’ कहलाता है. अव्ययी भाव, कर्मधारय, तत्पुरुष, द्वंद्व, द्विगु और बहुब्रीहि, भेद समास के छः होते हैं, व्याकरण की...

  • होली है होली !!

    होली है होली !!

    प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. रंग गुलाल चले भंग के संग मचाते शोर ! .. प्रेम फागुनी मन के उत्सव में भीगता रहे ! .. धरा ने खेला अम्बर संग रंग...

  • मोह्हबत

    मोह्हबत

    मेरे आंसुओं का हिसाब कैसे चुका पाओगे जाओगे जब जन्नत में मेरा ही नूर पाओगे प्यार की जरूरत ने हमें भिखारी बना दिया दीवाने प्यार के हम जैसे और कहाँ पाओगे देखी न होगी ऐसी दर्द...