कविता

सरहद कोई लकीर नहीं

सरहद कोई लकीर नहीं
है हर दुश्मनी का आगाज़।
जहाँ खिंच जाती है यह
बन जाती है वहाँ दीवार।
दो मुल्कों की दोस्ती को
बना देती है बेजान।
खून के मीठे रिश्तों को भी
चखा देती है नीम का स्वाद।
भाईचारे के संदेश को भी
चटा देती है यह धूल।
इसीलिए…
सरहद कोई लकीर नहीं
है हर दुश्मनी का आगाज़।
श्रीयांश गुप्ता

परिचय - श्रीयांश गुप्ता

पता : श्री बालाजी सलेक्शन ई-24, वैस्ट ज्योति नगर, शाहदरा, दिल्ली - 110094 फोन नंबर : 9560712710

Leave a Reply