रस्म अदायगी

वॉलिबॉल खिलाड़ी और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के लिए 29 जनवरी, 2018 एक बार फिर जीत का दिन बन गया था. इस बार यह जीत उसे कानूनी लड़ाई में हासिल हुई थी. उसे याद आ रहा था आज से सात पहले का एक दर्दनाक हादसे वाला दिन, जब हवाएं तो सर्द नहीं थी, लेकिन कुछ अराजकतत्वों के दिल अवश्य सर्द हो गए थे.

यह हादसा 11.4.11 को हुआ था. खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा पद्मावत एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं. बरेली से पहले धनेती रेलवे स्टेशन पर कुछ अराजकतत्वों ने उनके साथ बुरी तरह से मारपीट की और उन्हें धक्का देकर ट्रेन से फेंक दिया. स्टेशन मास्टर से सूचना मिलने पर पहुंची रेलवे पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था. हालत में सुधार न होने पर अरुणिमा को दिल्ली भेजा गया था, जहां उनका पैर काटना पड़ गया. तब से शुरु हुई थी वह कानूनी लड़ाई.

इस कानूनी लड़ाई के दाव-पेचों के बारे में क्या बताया जाए! पहले तो रेलवे अरुणिमा को रेलयात्री ही नहीं मान रहा था, जबकि अरुणिमा का ट्रेन टिकट सबूत के तौर पर शुरुआत में ही सौंप दिया गया था. रेलवे का यह भी कहना था कि वह जानबूझकर ट्रेन से कूदी हैं. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब रेलवे ने अपनी चूक मान ली है.

इस बीच अरुणिमा ने कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट फतेह किया. 29 जनवरी, 2018 को रेलवे क्लेम्स ट्राइब्यूनल -लखनऊ बेंच ने रेलवे को सात लाख बीस हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश जारी किया. 7 साल से तन-मन से बुरी तरह आहत-घायल कृत्रिम पैर के सहारे जीने वाली अरुणिमा को जनवरी की सर्द हवाओं में इस मामूली मुआवजे को मंजूर करने की रस्म अदायगी की गई थी.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।