लघुकथा

दर्प

ट्रेकिंग पर जाने की सारी तैयारी हो चुकी थी। कुछ ही समय में दल निकलने वाला था। सुभाष बहुत उत्साहित था। वह उस उँचे पहाड़ को ऐसे देख रहा था मानो चुनौती दे रहा हो।
उसके साथी उसका उत्साह बढ़ा रहे थे किंतु उसे लेकर फिक्रमंद भी थे।
पिछली ट्रेकिंग पर हुए हादसे में सुभाष का एक पांव कट गया था। लेकिन इससे वह तनिक भी डरा हुआ नहीं था। उसका हौंसला अपने  कृत्रिम पैर से पहाड़ का दर्प चूर करने को तैयार था।

*आशीष कुमार त्रिवेदी

नाम :- आशीष कुमार त्रिवेदी पता :- C-2072 Indira nagar Lucknow -226016 मैं कहानी, लघु कथा, लेख लिखता हूँ. मेरी एक कहानी म. प्र, से प्रकाशित सत्य की मशाल पत्रिका में छपी है