स्वप्नदोष : कारण और निवारण

यह अधिकांश नवयुवकों को होने वाली शिकायत है, परन्तु संकोचवश या लज्जावश वे किसी से इसकी चर्चा नहीं करते। जब यह शिकायत बहुत बढ़ जाती है तो वे तथाकथित यौन रोग विशेषज्ञों के पास जाकर अपना धन और समय नष्ट करते हैं, फिर भी उनको कोई लाभ नहीं होता और शिकायत बढ़ते-बढ़ते उनके स्वास्थ्य का सर्वनाश करने लगती है।

प्राकृतिक चिकित्सा में स्वप्नदोष का उपचार बहुत ही सरल और साधारण है। यह वास्तव में शारीरिक कम मानसिक दोष अधिक है। आजकल का उत्तेजक वातावरण और प्रदूषण बहुत सीमा तक इसके लिए उत्तरदायी है। स्वप्नदोष के प्रमुख कारण हैं- विषय-वासना का चिन्तन करना, उत्तेजक फिल्में देखना या चर्चा करना, मिर्च-मसाले से भरपूर खाद्यों का सेवन करना, हानिकारक पेयों चाय, काॅफी, शीतल पेय, तथाकथित शक्तिदायक पेयों आदि का सेवन करना, घर के बने ताजा भोजन के बजाय बाजारू फास्ट फूड अधिक खाना आदि।

इन सब कारणों से उनका वीर्य पतला होकर समय-बेसमय निकलने लगता है। जब रात में सोते-सोते उत्तेजक सपने देखते हुए अचानक बड़ी मात्रा में निकलता है तो वह रोग बन जाता है। जो नवयुवक अपने हाथ से अपना वीर्य नष्ट करते हैं और फिर किसी के कहने से बंद कर देते हैं, तो उनको स्वप्नदोष की बहुत अधिक शिकायत शुरू हो जाती है।

यहाँ यह जानना आवश्यक है कि शरीर में वीर्य का निर्माण होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और नवयौवन के समय महीने में एक-दो बार उसका निकल जाना भी लगभग स्वाभाविक है। अतः इतने से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि स्वाभाविक रूप से जितना वीर्य निकलता है, वह अपने आप बनता रहता है और उसका स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन उत्तेजनावश बार-बार अपने हाथ से ही अपना वीर्य नष्ट करना एकदम अस्वाभाविक है और उसका कुप्रभाव देर-सबेर स्वास्थ्य पर पड़नाअवश्यंभावी है।

इसके कारणों को समझ लेने के बाद इसका उपचार करना बहुत सरल हो जाता है। सबसे पहले तो ऊपर बतायी गयी सभी तामसी वस्तुओं को त्याग देना चाहिए और अपना आहार-विहार सात्विक रखना चाहिए। अपने भोजन में फलों और सलाद की कुछ मात्रा अवश्य रखें। नित्य अधिक से अधिक सामान्य शीतल जल पीना और कम से कम आधा-पौन घंटे व्यायाम करना अनिवार्य है। केवल इतना करने से ही इस समस्या की जड़ कटने लगती है और धीरे-धीरे यह शिकायत समाप्त हो जाती है।

इसके साथ ही निम्नलिखित उपाय करने से यह समस्या जड़ से चली जाती है-

1. सबसे पहले अपने मलाशय को साफ रखने का उपाय करें। इसके लिए प्रातः उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू का रस निचोड़ लें और चाहें तो उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर पियें। इसके बाद 5 मिनट टहलकर शौच जायें।

2. शौच के बाद अपने पेड़ू पर 2-3 मिनट खूब ठंडे पानी से पौंछा लगायें और फिर या तो टहलने निकल जायें या ऐसा व्यायाम करें जिससे पसीना आ जाये। ऐसा करने से कुछ ही दिन में आपकी पाचनशक्ति और मलनिष्कासन तंत्र मजबूत हो जाएगा। यदि साथ में कुछ प्राणायाम भी करें तो सोेने में सुहागा हो जाये।

3. रात को सोते समय दूध न पियें। इससे अच्छा है कि दूध का सेवन प्रातः जलपान के साथ करें। रात में गर्म दूध पीने से स्वप्नदोष की शिकायत बहुत होते देखी गयी है। इसका कारण यह है कि दूध उत्तेजक होता है।

4. रात को सोने से पूर्व अधिक जल पीना भी उचित नहीं है। केवल आधा गिलास जल ही पियें। सोने से पूर्व मूत्र विसर्जन अवश्य कर लें। यदि रात को भी मूत्र विसर्जन के लिए उठते हैं, तो मूत्र विसर्जन के बाद फिर आधा गिलास साधारण शीतल जल पिया जा सकता है। हालांकि यह आवश्यक नहीं है।

इन साधारण उपायों को अपनाकर स्वप्नदोष जैसे रोग से सहज ही मुक्ति पायी जा सकती है।

विजय कुमार सिंघल
फाल्गुन कृ 14, सं 2074 वि (14 फरवरी 2018)

परिचय - विजय कुमार सिंघल

नाम - विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के रूप में सेवारत। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, सम्पर्क सूत्र - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, हजरतगंज, लखनऊ- 226001, दूरभाष- 0522-2286542 (कार्या.), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com