हर दिन जो चॉकलेट डे होता

कितना अच्छा होता ममी!
हर दिन जो चॉकलेट डे होता,
तुम दे देती चॉकलेट मुझको,
जब भी मैं रूठकर रोता.

बार-बार मैं रूठता और फिर
कभी मानता कभी मनाता,
इसी तरह हर दिन ममी जी,
प्यार आपका मैं पाता.

रूठने और मनाने में
मजा बहुत ही आता है,
तब मिलता है जो चॉकलेट,
उसका तो स्वाद निराला है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।