क्षणिकाएँ – बेखबर, वक़्त, यादें

कैसे ये मान लें कि….
खामोशियों की भी जुबां है !
खामोश मेरे लब हैं..,
और वो मुझसे बेखबर है !!

*****************************

किया है ये वादा,
बढ़ायेंगे कुछ दूरियाँ.. …

पर तेरे हिस्से का वक़्त
काटे कटता नहीं है !!

*****************************

अतीत के कुछ साये,
कुछ चाहतों के सदके,
आज फिर से तेरी यादें…. मेरे दर पे आ खड़ी हैं !!

अंजु गुप्ता

 

परिचय - अंजु गुप्ता

Am Self Employed Soft Skills Trainer with more than 20 years of rich experience in Education field. Writing is my passion. Qualification: B.Com, PGDMM, MBA, MA (English)