‘निकी न्यूट्री चॉकलेट’

सुबह-सुबह निकी ने अखबार खोला, तो सबसे पहली खबर थी-

”जीत के बाद बोले कोहली, साझा प्रयासों से मिली सफलता”

‘साझा प्रयास’ शब्द से उसे याद आई कुछ दिन पहले की वह सुनहरी खुशनुमा शाम, जब उसे राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ उद्यमी महिला’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उसने भी समारोह के बाद पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देते हुएअपनी इस महान उपलब्धि का श्रेय ‘साझा प्रयास’ को ही दिया था.

वह उपलब्धि ‘साझा प्रयास’ के कारण ही तो मिली थी. वरना पति के अकाल देहावसान के बाद सामान्य शिक्षा प्राप्त निकी रोते-झींकते जिंदगी बिताने को मजबूर होती. उसकी जिंदगी को नई तरह से संवारने का काम उसकी बहू मोनिका ने किया था. स्वभावतः एक कलाकार मोनिका ने शादी के तुरंत बाद घर में ही ‘ऑर्ट क्लासेज’ शुरु कर दी थीं. संभांत घरों की बच्चियां व महिलाएं चित्रकारी, पेंटिंग, पैकिंग आदि सीखने उसके पास आया करती थीं. वह खुद भी अभी तक नई-नई कलाएं सीखने में संलग्न थी. हनीमून के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थी, तो वहां से चॉकलेट बनाना सीखकर आई थी. सास का मन लगाए रखने के लिए उसने घर में ही इम्पोर्टेड चॉकलेट बनाने का काम शुरु कर दिया और उस व्यवसाय को सास के नाम ‘निकी न्यूट्री चॉकलेट’ से शुरु किया. वह खुद चॉकलेट बनाती, उसकी सास और मेड उनकी पैकिंग करतीं. धीरे-धीरे निकी भी चॉकलेट बनाना सीख गई. अब तो उसे पता ही नहीं लगता, कि समय कहां उड़ा जा रहा था! बहुत लोकप्रिय उसके चॉकलेट की बिक्री भी खूब हो रही थी. इस प्रकार ‘साझा प्रयास’ से ही वह इतने बड़े सम्मान की हकदार बनी थी.

‘साझा प्रयास’ से पल्लवित और फलने-फूलने वाला ‘निकी न्यूट्री चॉकलेट’ आज सफलता के शिखर को चूम रहा था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।