गफ़लत

कभी-कभी हम ऐसी गफ़लत की गिरफ़्त में गिरफ़्तार हो जाते हैं, कि समझ ही नहीं आता, कि सब कुछ जानते हुए भी किसी समय समझदारी कहां चली जाती है! आज उसके साथ ऐसा ही हुआ. वह परेशान भी है और पशेमान भी.

सभी खाताधारकों की तरह वह भी जानती थी, कि बैंक की ओर से ऑनलाइन पेमेंट से पहले आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी को न बताने की सलाह दी जाती है. उसको एक टेलिकॉलर द्वारा 10 रुपये प्रोसेसिंग फीस लगने की बात कही गई थी. उसने अपने दो डेबिट कार्डों से 10 रुपये जमा कराने की कोशिश की, लेकिन उससे नहीं हो पाया. तभी एक टेलिकॉलर ने उसकी मदद करने के लिए उसका ओटीपी पूछा. उसको अपना शुभेच्छु समझकर गफ़लत में उसने बैंक की सलाह को अनसुना करके उसको ओटीपी बता दिया. टेलिकॉलर को उसकी बाकी जरूरी जानकारी तो उसके 10 रुपये जमा कराने की कोशिश से ही पता लग गई थी.

थोड़ी ही देर में पता चला कि उसके उसके 10 रुपये तो जमा नहीं हुए, अलबत्ता उसके दोनों डेबिट कार्ड ब्लॉक हो गए. बाद में बैंक को फोन करने पर पता चला, कि उसके अकाउंट से बीस मिनट में 10 बार में 75 हजार रुपये निकाल लिये गये थे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।