वेषभूषा

आज मुझे कुछ दिन पहले की बात याद आ गई.

मैं और अम्बिका सैर कर रहे थे. हल्की-फुल्की बातें चल रही थीं. आजकल की वेषभूषा पर मैंने कहा- ”आजकल तो लड़कियों की वेषभूषा भी ऐसी हो गई है, कि कई बार तय ही नहीं कर पाते, कि अमुक लड़की है या लड़का.” अम्बिका हंस पड़ी.

आज अम्बिका का फोन आया-
”आंटी जी, आपने वह खबर पढ़ी? उस दिन आपकी बात पर मैं हंस पड़ी थी, लेकिन इस समाचार ने आपकी बात को सही सिद्ध कर दिया.”

”कौन-सी खबर बेटा?” मैंने पूछा.

”लड़का समझ डीयू स्टूडेंट को पीटा, …’लड़की हूं’ सुनते ही भागे हमलावर”.  अम्बिका का कहना था.

कैसी विचित्र विडंबना है कि लड़की को पिटाई से बचने के लिए कहना पड़े- ”मैं लड़की हूं”! तनिक रुककर अम्बिका ने कहा.

लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।