ब्रेन ट्यूमर शल्य चिकित्सा में भारतीय विश्व कीर्तिमान

भारतीय चिकित्सकों ने एक बार फिर विश्व के समक्ष यह साबित कर दिया है कि भारत में आज भी जटिल शल्यचिकित्सा में महारत हासिल चिकित्सकों की कमी नहीं है। भारतीय चिकित्सकों ने अब तक का सबसे बड़ा मस्तिष्क ट्यूमर सफलतापूर्वक एक मरीज के सिर से निकाला है। ऐसा माना जा रहा है कि यह विश्व में ब्रेन ट्यूमर की अबतक की सबसे बड़ी शल्यक्रिया है। 22 फरवरी 2018 का दिन इस असाधारण भारतीय शल्यचिकित्सा का साक्षी बन गया है। मुंबई स्थित बीएमसी के नायर अस्पताल में शल्यचिकित्सक डॉ. त्रिमूत्री नंदकरणी ने अपने साथी डॉक्टरों के साथ मिलकर ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त एक मरीज के सिर से 1.8 किग्रा का ट्यूमर ऑपरेशन द्वारा अलग किया। इससे पहले भी न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिमूत्री नंदकरणी अपनी शल्य मेधा का परिचय दे चुके हैं, जब उन्होंने सन् 2002 में भी बीएमसी के केईएम अस्पताल में एक मरीज के सिर से 1.4 किग्रा का ब्रेन ट्यूमर निकाला था।

वास्तव में ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क की एक बीमारी है, जिसमें एक गांठ बन जाती है। इसे ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन कैंसर भी कहा जाता है। मस्तिष्क कोशिकाओं में जब संक्रमण हो जाता है, तो वे धीरे धीरे बढ़कर पहले एक गांठ का रुप ले लेती हैं, जो बाद में और अधिक बड़ी होकर विकृत असामान्य आकार ले लेती है। कभी कभी व्यक्ति को सिर पर अन्दुरूनी चोट लग जाती है और उस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता या फिर कई बार लोग दूषित वायु या तीब्र दुर्गंध वाली कोई गैस ज्यादा देर तक सूंघ लेते हैं, अनेक बार दूषित जल के सेवन या फिर दिमागी बुखार के देर तक बने रहने से मस्तिष्क संक्रमित हो जाता है। इन सभी कारणों से मस्तिष्क में ब्रेन ट्यूमर बनने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसलिए हमेशा कहा जाता है कि सिर को चोट से बचाना चाहिए।

हांलाकि चिकित्साक्षेत्र में हो रहे उत्तरोत्तर वैज्ञानिक विकास के कारण सामान्य भाषा में लाइलाज कही जाने वाली अन्य बीमारियों की तरह ब्रेन ट्यूमर का उपचार भी बहुत सरल हो गया है। यदि समय रहते मरीज चिकित्सकों तक पहुंच जाते हैं, तो उनको ब्रेन ट्यूमर से भी मुक्ति मिल सकती है। मस्तिष्क में ट्यूमर की स्थिति, कैंसर संक्रमण, मस्तिष्क कोशिकाओं में ट्यूमर मेलिगेन्ट, ट्यूमर का आकार और उसका प्रकार आदि इसके इलाज में अधिक मायने रखते हैं। इन सभी तथ्यों के गहन अध्ययन के बाद ही कोई चिकित्सक मस्तिष्क में ट्यूमर का उपचार करता है।

ब्रेन ट्यूमर दो प्रकार का होता है या तो यह कैंसर रहित होता है अथवा कैंसर युक्त भी हो सकता है। कैंसर रहित ट्यूमर को शल्यक्रिया के माध्यम से अलग कर देने पर उस स्थान पर दोबारा ट्यूमर नहीं बनता है लेकिन कैंसरयुक्त ट्यूमर को निकाल देने के बाद भी वहां दोबारा ट्यूमर होने की आशंका हो सकती है। हांलाकि आजकल दोनों तरह के ब्रेन ट्यूमर का उपचार काफी सामान्य बात हो गई है। शल्यचिकित्कों ने हर तरह के मस्तिष्क ट्यूमर को निकालने में सफलता हासिल कर ली है। वर्तमान में स्टीरियोटौक्सी एवं सी आर्म की सहायता से ब्रेन ट्यूमर की शल्यक्रिया की जाने लगी है,  जिससे ऑपरेशन में किसी भी तरह की त्रुटि होने की आशंका नहीं रहती है और ऑपरेशन पूरी तरह से सफल होता है। विश्व स्तर पर ब्रेन ट्यूमर के उपचार के लिए  इम्यूनोथिरेपी पर भी शोध चल रहे हैं। भविष्य में इस थिरेपी का उपयोग ब्रेन ट्यूमर के उपचार में किया जा सकता है।

कैंसर युक्त छोटे छोटे ट्यूमरों को नष्ट करने के लिए गामा नाइफ, साइबर नाइफ, स्टीरियोटैक्टिक, रेडियोथेरेपी जैसे कुछ गैर शल्यक्रिया वाले विकल्पों का भी उपयोग किया जाने लगा है। इसके अलावा कम्प्यूटर नैविगेशन पर आधारित शल्यक्रिया में मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), इंट्रोआपरेटिव एमआरआई, कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) और पोजिट्रॉन इमिशन टोमोग्राफी (पेट) स्कैन जैसी इमेजिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग भी इसके इलाज में किया जा रहा है। साररुप में यह कहा जा सकता है कि विश्व के साथ साथ अब भारतीय चिकित्सकों ने भी ब्रेन ट्यूमर ही नहीं बल्कि हर तरह के कैंसर से निपटने के लिए भारतीय मरीजों को आश्वस्त कर दिया है। फिर भी स्वास्थ को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही जीवन में कठिनाईयां तो पैदा करती ही हैं। अतः लोगों को ऐसी परिस्थितियों से बचना चाहिए, अलबत्ता सतर्कता बरतनी चाहिए, जो ब्रेन कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे सकती हैं।

परिचय - डॉ शुभ्रता मिश्रा

डॉ. शुभ्रता मिश्रा वर्तमान में गोवा में हिन्दी के क्षेत्र में सक्रिय लेखन कार्य कर रही हैं । उनकी पुस्तक "भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र" को राजभाषा विभाग के "राजीव गाँधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार-2012" से सम्मानित किया गया है । उनकी पुस्तक "धारा 370 मुक्त कश्मीर यथार्थ से स्वप्न की ओर" देश के प्रतिष्ठित वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुई है । इसके अलावा जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली) द्वारा प्रकाशक एवं संपादक राघवेन्द्र ठाकुर के संपादन में प्रकाशनाधीन महिला रचनाकारों की महत्वपूर्ण पुस्तक "भारत की प्रतिभाशाली कवयित्रियाँ" और काव्य संग्रह "प्रेम काव्य सागर" में भी डॉ. शुभ्रता की कविताओं को शामिल किया गया है । मध्यप्रदेश हिन्दी प्रचार प्रसार परिषद् और जे एम डी पब्लिकेशन (दिल्ली)द्वारा संयुक्तरुप से डॉ. शुभ्रता मिश्राके साहित्यिक योगदान के लिए उनको नारी गौरव सम्मान प्रदान किया गया है। इसी वर्ष सुभांजलि प्रकाशन द्वारा डॉ. पुनीत बिसारिया एवम् विनोद पासी हंसकमल जी के संयुक्त संपादन में प्रकाशित पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न कलाम साहब को श्रद्धांजलिस्वरूप देश के 101 कवियों की कविताओं से सुसज्जित कविता संग्रह "कलाम को सलाम" में भी डॉ. शुभ्रता की कविताएँ शामिल हैं । साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में डॉ. मिश्रा के हिन्दी लेख व कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं । डॉ शुभ्रता मिश्रा भारत के हिन्दीभाषी प्रदेश मध्यप्रदेश से हैं तथा प्रारम्भ से ही एक मेधावी शोधार्थी रहीं हैं । उन्होंने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से वनस्पतिशास्त्र में स्नातक (B.Sc.) व स्नातकोत्तर (M.Sc.) उपाधियाँ विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की हैं । उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से वनस्पतिशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की है तथा पोस्ट डॉक्टोरल अनुसंधान कार्य भी किया है । वे अनेक शोधवृत्तियों एवम् पुरस्कारों से सम्मानित हैं । उन्हें उनके शोधकार्य के लिए "मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक पुरस्कार" भी मिल चुका है । डॉ. मिश्रा की अँग्रेजी भाषा में वनस्पतिशास्त्र व पर्यावरणविज्ञान से संबंधित 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।