मोह्हबत

मेरे आंसुओं का हिसाब कैसे चुका पाओगे
जाओगे जब जन्नत में मेरा ही नूर पाओगे

प्यार की जरूरत ने हमें भिखारी बना दिया
दीवाने प्यार के हम जैसे और कहाँ पाओगे

देखी न होगी ऐसी दर्द की दीवार ओ खास
सदियों में कोई राधा हम जैसी ढूंढ पाओगे

कब मांगा था तेरे दीदार के सिवा कुछ और
हम तो हैं सिर्फ तुम्हारे कब हमको जान पाओगे ।

दिया है आंसुओं का तोहफा वो भी मंजूर है
रूठ गए गर हम तो कैसे खुश रह पाओगे !
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन