होली है होली !!

प्रेम फागुनी
मन के उत्सव में
भीगता रहे !
..
रंग गुलाल
चले भंग के संग
मचाते शोर !
..
प्रेम फागुनी
मन के उत्सव में
भीगता रहे !
..
धरा ने खेला
अम्बर संग रंग
मचा धमाल !

होली के रंग
अपनों के संग हैं
कहे फागुन !

होली के रंग
पिचकारी के संग
भीगे गुलाल !

पीकर भंग
बोले होली है होली
रंगों की टोली !

परिचय - सीमा सिंघल 'सदा'

जन्म स्थान :* रीवा (मध्यप्रदेश) *शिक्षा :* एम.ए. (राजनीति शास्त्र) *लेखन : *आकाशवाणी रीवा से प्रसारण तो कभी पत्र-पत्रिकाओ में प्रकाशित होते हुए मेरी कवितायेँ आप तक पहुँचती रहीं..सन 2009 से ब्लॉग जगत में ‘सदा’ के नाम से सक्रिय । *काव्य संग्रह : अर्पिता साझा काव्य संकलन, अनुगूंज, शब्दों के अरण्य में, हमारा शहर, बालार्क . *मेरी कलम : सन्नाटा बोलता है जब शब्द जन्म लेते हैं कुछ शब्द उतरते हैं उंगलियों का सहारा लेकर कागज़ की कश्ती में नन्हें कदमों से 'सदा' के लिए ... ब्लॉग : http://sadalikhna.blogspot.in/ ई-मेल : sssinghals@gmail.com