लघुकथा

विज्ञान-बाला

आज हर्षिता के हर्ष का ठिकाना नहीं था. वह अतीत की स्मृतियों में खो गई. हर्षिता न तो आईटी कंपनी की इंजिनियर है और न ही अधिक पढ़ी-लिखी बाला, लेकिन छोटी-सी उम्र में प्रतिभा में वह किसी से कम नहीं है.  ”आपने 14 साल की उम्र में पढ़ाई क्यों छोड़ दी थी?” पत्रकार द्वारा सहारनपुर […]

कविता पद्य साहित्य

 *प्रेम व ब्रह्मांड

*कविता*   *प्रेम व ब्रह्मांड*   (प्रेम को समझना ब्रह्मांड को समझने की तरह है,  कविता में ब्रहमांड की उत्पत्ति को वैज्ञानिक तरीके से पेश किया गया है ।)   नहीें है कोई आयाम न दिशा ब्रह्मांड का प्रेम भी है दिशाविहीन आयामहीन दोनों में है इतनी समानता जैसे ब्रहमांड के रहस्य जानता हो प्रेमी […]

गीतिका/ग़ज़ल

भोजपुरी में एक ग़ज़ल – फागुन मा

गुलाल लै के बुलावेली भौजी फागुन मा । हजार रंग दिखावेली भौजी फागुन मा ।। छनी है भांग वसारे बनी है ठंढाई । पिला के सबका नचावेली भौजी फागुन मा ।। जवान छोरे इहाँ दुम दबा के भागेलें । नवा पलान बनावेली भौजी फागुन मा ।। रगड़ गइल है कोई गाल पे करियवा रंग । […]

कविता

याद गोधरा की ,जलती हुई वसुंधरा की

रेल में बैठे थे यात्री कई हजार सफर में मशगूल , खुशियाँ अपरंपार पर अचानक घटित हुआ कुछ ऐसा इक डब्बे पर अचानक हुआ वार याद है ना वो प्लेटफार्म , वो डब्बे वो जलने के निशान ,वो काले धब्बे बंद थे बाहर से दरवाजे अंदर से आ रही थी आवाजे कातर स्वर में चीख […]

बाल कविता शिशुगीत

होली आई (बाल गीत)

होली आई, होली आई, अपने साथ खुशी है लाई, खूब गुलाल उड़ेगा अब तो, पिचकारी में रंग भर लाई. आज करेंगे खूब रंगाई, होली आई है मनभाई, घर-घर से आवाज है आई, होली आई, होली आई.

कविता

शब्दों के बाण 

शब्दों के बाण  आप ऐसे तो न  मारिये , कुछ तो सोचिये कुछ  तो विचारिये । चुभते है तो ये सबको शूल की  तरह , क्या लगते है ये मुझको फूल की तरह । कुछ  तो गौर कीजिये,       औरों को बताइये , मुख खोलने से पहले जरा  तो विचारिये । ये तरकश […]

कविता

पल-पल

पल-पल की तू क्यों  बात करता है रे मन पलभर में ये पल अभी बदल जायेगा पल भर की ख़बर न होगी फिर तुझे  पलभर में समा ये अभी बदल जायेगा पल पल को रोक लो एक पल के लिए पल का फिर पता नहीं किधर जायेगा पल है तो पलभर को जी लेंगे हम […]

गीतिका/ग़ज़ल

“गीतिका”

कहाँ किसी से कहा कहीं है नहीं किसी की जुबा सही है अधर अधर को चखा रहें है न दूध प्याली जहाँ दही है॥ मधुर अगन पर पका रहे हैं जमी कढ़ीं को हिला रही है॥ उबल रही जो लपट तपन ले अगन लगाना कहाँ सही है।। विरह जिगर पर सहन करे जो सहज समझ […]

कहानी

“एक यह सियार है”

नम्रता को सरकारी नौकरी मिली तो परिवार खुशियों से झूम उठा। स्वाभाविक है नम्रता के अरमान फलने फूलने लगे और वह अपने हर कर्म को और भी लगन से करने लगी। कार्यालय में मित्र और उसके अधिकारी सब के सब उससे संतुष्ट थे। एक वर्ष कैसे बीत गया उसे पता भी न चला। जब उसके […]