गीत/नवगीत

” हासिल कुछ कर पाऊं ” !!

  पुलक रहा है तन मन ऐसा , लहर लहर लहराऊँ !! पैर नहीं है आज जमीं पर , पंछी सा मन चहके ! आसमान भी छू ही लूँगी , कदम नहीं हैं बहके ! जगी उमंगें पोर पोर हैं , कुछ पा जाना चाहूं !! आज लगे है मिटे फासले , धड़कन गीत सुनाए […]

भजन/भावगीत

दो हनुमान भजन

हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर विशेष   भजन-1 (तर्ज़- तारा है सारा जमाना श्याम हमको भी तारो——) तुम हो परम हितकारी, हनुमत जय-जय तुम्हारी महिमा है तेरी निराली, हनुमत जय-जय तुम्हारी- 1.तुम हो हनुमत गुण के सागर भर दो गुणों से पिटारी हनुमत जय-जय तुम्हारी- 2.तुम हो हनुमत भाग्य-विधाता किस्मत जगाओ हमारी हनुमत जय-जय […]

गीतिका/ग़ज़ल

पीर

झूठी शान अब हमसे दिखाई नहीं जाती, ये दुनियादारी की रस्में निभाई नहीं जाती । मत डाल इतना बोझ इन कंधो पर खुदा, ये जिम्मेदारियां मुझसे उठाई नहीं जाती । झूठे चेहरे, जज्बात लिए फिरते है लोग, दिल की बात हरेक से बताई नहीं जाती । समझना सीख कभी खामोशियां मेरी, हर बात लफ्जों में […]

लघुकथा

बोझ

”मैं 13 साल की बच्ची नंदिता हूं, स्कूल बैग के बोझ तले पूरी तरह दबी हुई.” ”क्या कहा आपने? स्कूल बैग के बोझ भी कोई बोझ होता है?” ”सच है, आप मेरी पीड़ा महसूस कैसे कर सकते हैं? आपके जमाने में न तो इतनी मोटी किताबें होती थीं, और न ही इतनी मोटी-मोटी होम वर्क […]

गीत/नवगीत भजन/भावगीत

मानव बनकर दिखलाएं हम

(तर्ज़- वह शक्ति हमें दो दयानिधे कर्त्तव्य मार्ग पर डट जाएं——)   हैं मानव तेरी दुनिया के, मानव बनकर दिखलाएं हम ऐसा वर दो हे नाथ हमें, जग हेतु कुछ कर पाएं हम- हम सरिता हैं तेरे सागर की, हम लहरें हैं तेरी सरिता की ऐसा वर दो हे नाथ हमें, खुशहाली लहरा पाएं हम- […]

राजनीति

भयावह त्रासदी हैं बिहार और बंगाल के दंगे

रामनवमी के दिन से ही बिहार और बंगाल हिंसा की आग में जल रहे हैं, लेकिन देश के सभी सांसद संसद ठप करने में और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी खिसकती जमीन को बचाने के लिए दिल्ली में डेरा डालकर मोदी विरोधी मोर्चा बनाने में जुटी हुई हैं। लगातार तीन दिनों तक बंगाल हिंसा […]

गीत/नवगीत

शराबबंदी

घर बन गया मन मंदिर बन गया, शराबबंदी से मेरा संसार बस गया। आता था पिके मारता था हमें दुनियां के भीड़ से डराता था हमें मदिरा एक सामाजिक कलंक बन गया, शराबबंदी …………… मदिरा से हमारे संस्कार चले जातें है विवेक और ज्ञान सदभाव चले जातें है मदिरा से आदमी शैतान बन गया शराबबंदी […]

कविता

कविता – पर्यावरण

चल रहे हम किधर खुद ही नहीं पता है मानव विनाशलीला खुद ही खोद रहा है। चलती है मेरी नैया डुलती है मेरी नैया हम कहाँ बढ़ रहे है खुद ही नहीं पता है मानव………………. चलते है हम आगे देखते नहीं हम पीछे विकास के चक्कर में खुद कब्र खोद रहा है मानव………………. पर्यावरण की […]

गीत/नवगीत

आल्हा उत्तर प्रदेश का

बड़े लड़ैया सैफइ वाले, जेकरी लाज रखइं करतार लट्ठ बजइ हर दिन यूपी मा, निसरइ बल्लम अउर कटार पाँच डकैती, पचपन हत्या, राहजनी केउ गिनइ न भाइ लखनउवा कइ अइसन हालत, छोटकी गल्ती गिनी न जाइ थर-थर थर-थर पुलिसा काँपइ, गजब बनल यूपी कइ सीन डीएम, एसपी साँझ सकारे, बइठइं लइ ठर्रा-नमकीन गुंडा सगरे मौज […]

सामाजिक

लेख– राजनीति, घोटाले औऱ चुनाव का कॉकटेल बनता देश

तत्कालिक दौर में संसदीय लोकतंत्र की फ़ज़ीहत किसी देश में हो रही है। तो वह हमारा देश है। संसद में जनसरोकार की पैरवी होना जो शून्य में लीन हो रहीं। सार्थक बहस का अभाव संसद में स्पष्ट दिखता है। भ्रष्टाचार दूर करने का दावा सरकारें पेश करती हैं, लेकिन कामयाब होती नहीं। खुशहाली के मामले […]