कविता

खेलो होली ऐसी आज

आया होली का त्योहार,
पड़े रंग की फुहार,
आज धरती-गगन से भी,
बरसा है दुलार.

रंग एकता का डालो,
रंग डालो प्रेम का,
भेदभाव को हटाओ,
छेड़ो राह स्नेह का.

भाईचारे का गुलाल,
मौज-मस्ती का गुलाल,
रंग प्रीत का चढ़े,
मिट जाएगा मलाल.

धैर्य-साहस का अबीर,
क्षमा-दया का अबीर,
अत्याचार को मिटाए,
वही खरा है अबीर.

आई होली रंग-रंगीली,
लेकर खुशियों का संदेश,
छोड़ो खून-खराबा प्यारे,
वरना नहीं रहेगा देश.

खेलो होली ऐसी आज,
झूमे-महके देश-समाज,
भारत प्यारा देश बने हम ऐसी,
करें प्रतिज्ञा आज.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

3 thoughts on “खेलो होली ऐसी आज

  1. खेलो होली ऐसी आज,
    झूमे-महके देश-समाज,
    भारत प्यारा देश बने हम ऐसी,
    करें प्रतिज्ञा आज. बहुत अच्छा होली गीत लीला बहन .

    1. प्रिय गुरमैल भाई जी, यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ, कि आपको रचना बहुत सुंदर लगी. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

  2. न सूखा हो, न बाढ़,
    मौसम हो खुशगवार,
    तभी मन को मोह सकती है,
    त्योहारों की बहार.
    *होली* का अर्थ है नफरत और घृणा को बाहर निकालकर प्रेम करो।आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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