होली का डिजिटल उपहार, ई.बुक काव्यालय सदाबहार

आप सब डिजिटल उपहार की परिकल्पना से अवगत हैं. उपहार, वह भी डिजिटल उपहार तो वास्तव में एक अनोखा उपहार होता है.

 

अब बात करते हैं आज के डिजिटल उपहार की. हमने आप सबको सदाबहार काव्यालय के लिए अपनी काव्य-रचनाएं प्रेषित करने का आह्वान किया था. आप लोगों ने इस आह्वान का स्वागत किया और तुरंत कविताएं भेजनी शुरु कर दीं. हम भी प्रतिदिन इस सदाबहार काव्यालय की कविताओं को प्रकाशित करते रहे. आप लोगों की कविताए विषयों की विभिन्नता लिए हुए बहुत सुंदर, सटीक व सार्थक रहीं. हमने ब्लॉग ”काव्यालय की अविस्मरणीय सैर” में आपसे वादा किया था, कि हम सदाबहार कविताओं का एक संग्रह संकलित व प्रकाशित करेंगे. हमने उसका शीर्षक रखा है-

”सदाबहार काव्यालय”
यह तो आप जानते ही हैं, कि हमारी और हमारे पाठकों की रचनाओं की डिजिटल ई.बुक बनाने का काम हमारे सुपुत्र राजेंद्र कुमार तिवानी करते हैं. आपको यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा, कि इस बार ठीक होली के दिन हमें इस ई.बुक काव्यालय सदाबहार का लिंक प्राप्त हुआ. आप ”सदाबहार काव्यालय”को ई.बुक के रूप में देखने को उत्सुक होंगे. लीजिए आपकी प्रतीक्षा की घड़ियां समाप्त हुईं और आपके सम्मुख प्रस्तुत है- ई.बुक ”सदाबहार काव्यालय”. इसका लिंक है-

https://issuu.com/shiprajan/docs/sadabahar_kavyalaya_-_1

इस काव्य संकलन में सर्वश्री राजीव गुप्ता, गुरमेल भमरा, राजकुमार कांदु, अंकित शर्मा’अज़ीज़’, लखमीचंद तिवानी, मनजीत कौर, जितेंद्र अग्रवाल, आशीष श्रीवास्तव, डॉ. प्रदीप उपाध्याय, प्रवीण गुप्ता, प्रदीप कुमार तिवारी, युवा कवि राज सिंह, जीवन प्रकाश चमोली, कैलाश भटनागर एवं लीला तिवानी की कविताएं संग्रहीत हैं. इन सभी साथियों को यह लिंक मेल के द्वारा भी भेजा जा रहा है. हम इन सभी सुधिजन काव्यकारों के हृदय से आभारी हैं.
इस संकलन के बारे में दो विशेष बातें-

1.राजेंद्र कुमार तिवानी ने इस संकलन का कवर पेज हरियाली और खुशहाली से सुसज्जित सदाबहार बनाया है.

 

2.राजेंद्र कुमार तिवानी ने इसका नामकरण ”सदाबहार काव्यालय- 1” किया है. ”सदाबहार काव्यालय- 1” में भविष्य के लिए संभावनाएं छिपी हुई हैं. इसका सांकेतिक अर्थ यह है, कि अगर आप लोगों को हमारा यह प्रयत्न पसंद आया और आप लोगों की अन्य कविताएं आ गई, तो ”सदाबहार काव्यालय- 2” भी बन सकता है.
अंत में हम राजेंद्र कुमार तिवानी सहित सभी कवियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं.
चलते चलते-
होली के डिजिटल उपहार से पहले बात सरकार के उपहार की. ठीक होली वाले दिन समाचार पत्र की सुर्खी थी-

”होली का उपहार, सस्ता हुआ LPG सिलेंडर, आई बहार”

अब देखिए न! एक-एक रुपये के लिए मोहताज जनता को अगर LPG सिलेंडर 47 रुपये सस्ता मिलने लगे, तो फिर कहना ही क्या! हमें आशा है, कि जनता बहुत खुश होगी. तभी हमारे मन में पाठकों को कुछ उपहार देने की बात मन में आई और तुरंत हमें और आपको यह उपहार मिल भी गया, उपहार, वह भी डिजिटल.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।