लघुकथा

अनूठा आविष्कार

आज सभी समाचार पत्रों में मकैनिक मकरानी के पानी से चलने वाली कार के चर्चे हैं. मकरानी ने पानी और कार्बाइड से असिटिलीन बनाकर इसे विद्युत ऊर्जा लिक्विड फ्यूल में बदलने की तकनीक अपनाई है, जो 10-20 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से माइलेज देगी. मकरानी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया से प्रेरित होकर यह कार बनाई है. सबसे ख़ास बात है उनकी देशभक्ति. वे अपनी इस तकनीक को किसी भी विदेशी व्यक्ति या कंपनी से साझा नहीं कर रहे हैं. यह देसी तकनीक देश के विकास के लिए है. मकरानी की सफलता पर प्रकाशित इन समाचारों से उनकी पत्नी की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा और उनको कई साल पहले की बात याद आ गई.
”मैंने एक सपना देखा है.” सालों पहले मोहम्मद रहीस मकरानी ने पत्नी से कहा था.
”यह कौन-सी नई बात है? सपने सब देखते हैं और आप तो सपनों के सौदागर हैं. सुनूं तो भला, क्या देखा है?” पत्नी ने तंज से कहा था.
”मैंने सपने में देखा, कि मैंने पानी से चलने वाली कार बनाई है.” 
”मकैनिक साहब, सारा दिन कारें ठीक करते हो, तो सपना भी ऐसा ही तो देखोगे न!” पत्नी ऐसे ही कहां छोड़ने वाली थी.
”बेगम साहिबा, यह सपना मैंने बंद आंखों से नहीं खुली आंखों से देखा है, अल्लाह मियां ने चाहा तो देखना, यह सपना एक दिन यह सपना एक दिन हकीकत बनकर रहेगा.”
”सचमुच यह सपना हकीकत बन गया.” वह अपने से बोली और सबका मुंह मीठा करवाने के लिए मीठी सिवइयां बनाने चल पड़ी. 
उसे अपने शौहर की देशभक्ति पर भी बहुत गर्व महसूस हो रहा था. उसे यह सोचकर भी खुशी हो रही थी, कि पेट्रोल-डीजल का विकल्प बनने वाली यह अनूठे आविष्कार वाली तकनीक सस्ती भी पड़ेगी और पर्यावरण के अनुकूल भी रहेगी.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “अनूठा आविष्कार

  • लीला तिवानी

    एक भारतीय का अनूठा आविष्कार है पानी से चलने वाली कार, उस पर देशभक्ति का जज़्बा, सोने पे सुहागा हो गया है. आविष्कारक मकरानी को कोटिशः सलाम.

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