जिसकी यहां पर कब्र खुदी, ओ खुदा बन गया।।

ऐ मौत तू इतनी खूबसूरत क्यों है, जो गया तेरा हो गया।
जी भर के तुझे जो देख ले, वो इस दुनियां से खो गया।।

दीदार तेरे जलवों से करने, को जी अब कर रहा
कितनी हंसीन तू होगी, सोंच कर मैं आहें भर रहा।।
जब तक सांसों में दम है, तब तक तू छाई रहेगी।
लौट के ओ आया नही, जो कूंचे में तेरे चला गया।।
ऐ मौत तू ………….. दुनियां से खो गया।।

पायल की झंझनाट तेरी, सुनते ही सब चले गये।
हर अदा कातिल है तेरी, मरते ही सब चले गये
हूर भी शर्मा गयी, जलवों को तेरे देख कर-
क्या गजब की चीज है तू, जो खुदा बना गया
ऐ मौत तू …………. दुनियां से खो गया।।

आगोश में इक बार ले ले, बस यही है आरजू।
सांसों की सरगम की मेरी, बस तेरी ही जूस्तजू।
तू संवर कर इक बार आजा, दुनियां को मै छोंड़ दूं।
खानाबदोस तेरे वास्ते, बस बहुत अब हो गया।।
ऐ मौत तू ………… दुनियां से खो गया।।

मैं भी तुझको चाहता हूं, राह तेरी देख रहा।
पथरीले राहों पे तेरी, ऐडियां मैं रेत रहा।
क्या (राज) है तेरी अदा का, कुछ तो बताओ-
जिसकी यहां पर कब्र खुदी ओ खुदा बन गया।।
ऐ मौत तू …………. दुनियां से खो गया।।

परिचय - राज कुमार तिवारी (राज)

संवाददाता बाराबंकी उत्तर प्रदेश मो० 9984172782 इनका जन्म बाराबंकी जिले के जयचन्द्रपुर गांव के एक किसान के घर 1988 में हुआ था। इन्होने शिक्षा शास्त्र से परास्नाक की उपाधि प्राप्त की। इनको बचपन से ही लिखने का बड़ा ही शौख था, 15 वर्ष की आयु से ही इन्होने लिखना शुरू कर दिया था। 1998 से 2014 तक दूर दर्शन केन्द्र की मासिक पत्रिका से व लखनऊ से प्रकाशित होनेे वाली अन्य प्रत्रिका व समाचार पत्रों में भी स्थान प्राप्त किया। इनका कलम चलाने का सिलसिला अभी जारी है।