कविता

वह भगवान महावीर कहलाये

महावीर जयंती के पावन अवसर पर विशेष

 

12 वर्ष तपस्या करके,
मुखमंडल आभामय हो जाये,
आत्मज्ञान से जो दीपित हो,
वह भगवान महावीर कहलाये.

तम की परवाह करे न तनिक भी,
दीप-ही-दीप जलाता जाये,
भटके को जो राह दिखाए,
वह भगवान महावीर कहलाये.

सत्य सदा निश्छल रहता है,
दुनिया को यह राह दिखाये,
खुद निर्भय हो निर्भय कर दे,
वह भगवान महावीर कहलाये.

अहिंसा की राह पे चलकर,
औरों को चलना सिखलाये,
आनंद की निर्झरिणी जो बहाये,
वह भगवान महावीर कहलाये.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “वह भगवान महावीर कहलाये

  • लीला तिवानी

    महावीर जयंती के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं. खुशहाली और बंधुत्व के लिए भगवान महावीर के ये सिद्धांत सत्य और अहिंसा के उपासक थे. आज भी प्रासंगिक हैं. भगवान महावीर ने कहा-

    आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में संन्यास का मतलब- संसार से कट-ऑफ हो जाना नहीं है. अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सामाजिक बुराइयों के कीचड़ में खिले कमल की भांति पृथक रहना ही असली संन्यास और कैवल्य-ज्ञान का मार्ग है. भगवान महावीर ने पांच महाव्रतों- सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य को गृहस्थों के लिए सरल ढंग से पालन करने का विधान प्रस्तुत किया.

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