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वैदिक शोध केंद्र संस्थान (रिसर्च सेंटर फॉर वैदिक स्टडीज) – एक महायज्ञ का शुभारम्भ

मित्रो बहुत समय से मेरे मन में एक शोध केंद्र की स्थापना करने का विचार आ रहा था। आज इस कार्य को आरम्भ करने का संकल्प लिया है। इस केंद्र का उद्देश्य इस प्रकार होगा।
१. स्वामी दयानन्द के वैदिक दृष्टिकोण और आर्यसमाज से सम्बंधित विषयों पर शोध/अनुसन्धान को गति देना।
२. आर्यसमाज के विस्तृत साहित्य को एकत्रित कर उसे एक वृहद् पुस्तकालय के रूप में परिवर्तित करना।
३. महत्वपूर्ण एवं लुप्तप्राय: पुस्तकों का Digitisation अर्थात अंकीकरण कर उन्हें सभी के लिए सुलभ करना।
४. इस केंद्र को विश्वविद्यालयों में स्थापित दयानन्द चेयर, संस्कृत विभाग, इतिहास विभाग आदि से सलंग्न कर शोधार्थियों को सहायता देना।
५. पूर्व प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों का पुन: प्रकाशन एवं विभिन्न विषयों पर नवीन पुस्तकों का प्रकाशन करना।
६. इंटरनेट की साहित्य से सोशल मीडिया में वैदिक सिद्धांतों का विभिन्न प्रकार से प्रचार करना।
७. पुस्तक मेलों में आर्यसमाज की भागीदारी को बढ़ाना।
८. वैदिक सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वेबसाइट का संचालन करना।
९. देश और विदेश की विभिन्न भाषाओं में वैदिक साहित्य का अनुवाद करना और उसे प्रकाशित करना।
१०. नई पीढ़ी के लेखकों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध करवाना।
वर्तमान में 10 अलमारियों में करीब 2500 विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों का संग्रह मैंने इस केंद्र में किया है। मेरे पास करीब 50 अलमारियों को रखने की व्यवस्था है। कुल 12000 से 15000 छोटी-बड़ी पुस्तकों के केवल एक प्रति इस केंद्र में संग्रह की जाएगी। आर्यसमाज से सम्बंधित जो भी मित्र-सहयोगी इस शोध केंद्र में केवल आर्यसमाज से सम्बंधित अपनी दुर्लभ साहित्य को देना चाहते है। उनका स्वागत है।
मित्रो इस केंद्र आप सभी जुड़िये। यह केंद्र किसी सभा, मंडल, गुट,समाज आदि से न सम्बंधित है, न रहेगा। इसकी नीति निष्पक्ष रहकर सभी के सहयोग से स्वामी दयानन्द के मिशन का कार्य करने की रहेगी।
डॉ विवेक आर्य, शिशु रोग विशेषज्ञ, दिल्ली

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