Monthly Archives: March 2018

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हर आंदोलन का यही अंजाम होता है, आखिर में बेबस आम आदमी रोता है। दुकानें, रेहड़ी सिर्फ उसकी जलती हैं, सोचो ठेकेदार और नेता क्या खोता है। क्या मिलता है इमारतों को जलाकर, आम आदमी ही...

  • स्वीकार्यता

    स्वीकार्यता

    आज 80 साल के देवदास ने 76 साल की मगडु बाई से शादी रचाई. मगडु बाई 48 साल तक उनकी लिव-इन पार्टनर रही हैं. पूरे गांव में यह शादी आकर्षण का केंद्र रही. देवदास को कुछ...

  • पीड़ा

    पीड़ा

    पीड़ा पारावार हुई है, टूटे उर तंत्री के बंधन । समय व्याध तू गर रुक जाता ! तो यह निर्मम क्षण न आता । तूने युगल न तोड़ा होता – तन्हा क्रौंच न अश्रु बहाता ।...

  • आ गए शुभ नवरात्रे

    आ गए शुभ नवरात्रे

    आ गए शुभ नवरात्रे भक्तो माँ के दरबार में आओ, पाकर माँ का आशीष, अपना जीवन सफल बनाओ, आओ भक्तों आओ, माँ वैष्णो देवी के दरबार , माँ चरणो में शीश झुका के माँ का करो...

  • हाँ

    हाँ

    हाँ वो मारी गयी बहुत पहले ही नही बच पायी लाख कोशिश करने के बाद भी कसूर तो कुछ नही था बस हाँ वो सुन्दर थी सुशील थी, मनमोहक थी यही शायद उसकी कसूर थी तभी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रंममंच की डोर खिंची तो, नाम सभी बदनाम मिले, कुछ झंडों में छिपे हुए कुछ सिक्कों में नीलाम मिले। थाम के उँगली हमने जिनकी, ईश्वर को पाना चाहा उनके चर्चे, गली-गली में, कौड़ी-कौड़ी दाम मिले। वतनफरोशों...

  • गजल

    गजल

    टूट गई हैं सभी दीवारें, सत्ता के गलियारों में, भेष बदलकर बैठ गए हैं,कातिल पहरेदारों में। भेड़ों की चौपाल सजी है,खरगोशों का मेला है, लक्ष्य भेड़िये साध रहे हैं,मिलकर रंगे सियारों में। गिद्धों की टोली व्रत...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कातिल  हैं  जो  भेस  बदल  के  चारागर हो जाते हैं राह  जिन्हें  मालूम  नहीं  खुद  वो रहबर हो जाते हैं इश्क है जब पैगाम-ए-रब तो फिर सारे दुनिया वाले धर्म की आड़ में क्यों नफरत के...

  • पुस्तक परिचय : मुद्दा उछलना चाहिए

    पुस्तक परिचय : मुद्दा उछलना चाहिए

    वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव की नवीनतम कृति ‘मुद्दा उछलना चाहिए’ उनके द्वारा रचित 100 पृष्ठीय गजल संग्रह है | उत्तम गुणवत्ता वाला कागज, सुन्दर छपाई और आकर्षक आवरण पृष्ठ, जिसे बनाया है मुकेश कुमार...