लघुकथा

नव सुप्रभात

दिन की आपाधापी पूर्ण कोलाहल में भले ही अंतर्मन की भावनाएं सुषुप्तावस्था में रहें, लेकिन रात्रि के सन्नाटे के आगोश में वे पुनः जागृत हो उठती हैं. रुक्मा के साथ भी ऐसा ही हुआ था. आज उसने रेडियो पर सुबह-सुबह समाचारों के बाद एक कविता ‘सुप्रभात’ की दो पंक्तियां सुनी थीं. ”नयन का नयन से, […]

गीत/नवगीत

अरे इस होली में…

ना फायदा उठना, अरे इस होली में। ना कायदा झूठना, अरे इस होली में।। रंग लेके चलो फग जी भर खेलो । जोरा-जोरी करो ना, अरे इस होली में।। साथी छूटे कोई ना, रंग से छूटे कोई ना। डोर मर्यादा के भी टूटे ना, अरे इस होली में।। नाली कीचड़ नही, तेल मोबाइल नहीं । […]

गीत/नवगीत

हास्य गीत – किचन में मिल गए हो तुम

किचन में मिल गए हो तुम सहारा हो तो ऐसा हो जिधर देखूं तूम्हीं तुम हो नजारा हो तो ऐसा हो पडे हैं रात के बर्तन मगर महरी नहीं आई नहीं कोई फिकर मुझको तूम्हीं निपटाओगे भाई समझ जाओ निगाहों को नजारा हो तो ऐसा हो किचन में मिल गए हो तुम सहारा हो तो ऐसा हो […]

कविता

होली के टप्पे

-१- हंसी खुशी का मौज मजे का होली का त्योहार जिस पर पडे रगं का छींटे,बुरा ना माने यार मिटाती नफरत होली कलम कर रही ठिठोली -२- हाँ होली के कई फायदे ,होते हैं हर साल एक बार छूने को मिलते भाभीजी के गाल नशा दारु से बढ़ कर पियो प्यारे जी भर कर 3 — […]

कविता

होली पर राजनीतिक व्यंग

लैला लैला रटते रटते मंजनू हुआ दीवाना था यह भी मोदी मोदी रटते पागलखाने जाएंगे लेकिन जब इतिहास लिखा जाएगा पागलखाने का यह मोदी जी के दीवाने नंबर वन कहलायेंगे शूर्पणखा की याद आ गई सुनकर हंसी निराली मेज लोग थपथपा रहे हैं उसे समझकर थाली आप भी खुलकर खूब बजाओ तभी मजा आएगा होली […]

लघुकथा

बेबस

बेबस मास्टर सीताराम अपने घर में बैठे टीवी पर समाचार देख रहे थे कि पड़ोस से आ रही तेज शोरगुल की आवाज सुनकर बाहर निकले । पड़ोसी रमेश के घर के घर के सामने पुलिस की गाड़ी खड़ी थी व कुछ अन्य आदमी भी थे । पास पड़ोस के तमाशबीनों की भीड़ भी कुछ दूरी […]

लघुकथा

लघुकथा – बॉयफ्रेंड

एक होती है जननी जो हमे जन्म देती है और कुछ गलती हम करते है तो मार मारकर हमे सीधा भी कर देती थी। शादी के बाद हम बच्चो की अम्मा बन गए पर मार अभी भी खा ही लेते है हम अपनी अम्मा मतलब माँ के हाथ की। और ये तो मंदिर के प्रशाद […]

गीत/नवगीत

“बुरा न मानों होली में”

होली जोगिरा गीत उडी हवा हैं रंग भंग की छानो मेरे यार भौजी झाँके घर के बाहर पका रही अंचार…… जोगिरा सर र र र र र -1 कैसी कुर्ती कैसी टोपी कैसी री सलवार भीग रही है गोरी दैया बिना रंग बौंछार………. जोगिरा सर र र र र र-2 सम्हल के चलना नेता जी […]

गीतिका/ग़ज़ल

भीगी भीगी जाऊँ

रंग न डालो मुझ पर ऐसे , बलिहारी मैं जाऊँ ! भीगे तन मन और वसन सब , खड़ी खड़ी शरमाऊं !! लाल हरा पीला गुलाल है , सजा हुआ जो मुख पर ! पिचकारी ने भिगो दिया है , लाल लाल हो जाऊं !! तुम में कोई और छिपा है , आज शरारत ऐसी […]

कविता

खेलो होली ऐसी आज

आया होली का त्योहार, पड़े रंग की फुहार, आज धरती-गगन से भी, बरसा है दुलार. रंग एकता का डालो, रंग डालो प्रेम का, भेदभाव को हटाओ, छेड़ो राह स्नेह का. भाईचारे का गुलाल, मौज-मस्ती का गुलाल, रंग प्रीत का चढ़े, मिट जाएगा मलाल. धैर्य-साहस का अबीर, क्षमा-दया का अबीर, अत्याचार को मिटाए, वही खरा है […]