सामाजिक

वैदिक समाज व्यवस्था में शूद्र वर्ण के कर्तव्य एवं अधिकार

ओ३म् वैदिक समाज व्यवस्था को वैदिक वर्ण व्यवस्था के नाम से जाना जाता है। वर्ण का अर्थ चुनना या चयन करना होता है। ब्राहमण आदि श्रेष्ठ वर्णों का चयन मनुष्य को अपने गुण, कर्म व स्वभाव सहित अपनी योग्यता के अनुसार ही करना होता है। सभी मनुष्य विद्यालय जाते हैं। एक कक्षा में औसत तीस […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्यावर्त्त के सदृश भूगोल में दूसरा कोई देश नहीं है  

ओ३म् संसार में अनेक देश है जिनकी कुल संख्या 195 है। इनमें से कोई भी देश मानवता की दृष्टि, ईश्वर व आत्मा के ज्ञान सहित भारत के स्वर्णिम अतीत व वर्तमान की तुलना में महत्वपूर्ण नहीं है। महर्षि दयानन्द ने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश में लिखा है ‘आर्यावर्त्त देश ऐसा देश है जिसके सदृश […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदों की देन है सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त

ओ३म् आजकल सत्य और अहिंसा की बात बहुत की जाती है। वस्तुतः सत्य और अहिंसा क्या है और इनका उद्गम स्थल कहां हैं? इसका उत्तर है कि इन शब्दों का उद्गम स्थल वेद और समस्त वैदिक साहित्य है । वेद वह ग्रन्थ हैं जो सृष्टि की आदि में ईश्वर से मनुष्यों को प्राप्त हुए थे। […]

राजनीति

जागो दलितों जागो।

बुद्धू चमार का बेटा चेथरु आज घर को सर पर उठा लिया है। आज तक इतने गुस्से में उसे मैंने तो कभी नहीं देखा था। आम तौर पर वह बहुत सामान्य रहता है। उसे राजनीति से कोई दूर दूर तक का नाता नहीं रहा है। वह सिर्फ पढ़ने, थोड़ी देर दोस्तों के साथ खेलने और […]

कविता

अज़नबी

मैं तो एक अज़नबी हूँ आता रहता हूँ ख़्वावों में करती हो मेरा इंतजार क्यों क्यों देखती हो राहों में मांगती हो हरदम ख़ुदा से आता हूं तुम्हारी दुआओं में कहती नहीं हो किसी से तुम रहती हो अपनी कदराओं में मैं जानता हूँ कि तुम मुझको ढूँढती रहती हो चौबारों में तुमने कहा है […]

कविता

वह भगवान महावीर कहलाये

महावीर जयंती के पावन अवसर पर विशेष   12 वर्ष तपस्या करके, मुखमंडल आभामय हो जाये, आत्मज्ञान से जो दीपित हो, वह भगवान महावीर कहलाये. तम की परवाह करे न तनिक भी, दीप-ही-दीप जलाता जाये, भटके को जो राह दिखाए, वह भगवान महावीर कहलाये. सत्य सदा निश्छल रहता है, दुनिया को यह राह दिखाये, खुद […]

सामाजिक

लेख– पत्रकारिता का पेशा कब महफ़ूज होगा।

लोगों को यह कहते हुए सुना था, कि सच कड़वा होता है। अब पता चल रहा है। भारत में तो पत्रकारों के लिए सच कड़वा ही नहीं जानलेवा भी साबित हो रहा है। जिसकी हालिया समय में बानगी पेश की है, मध्यप्रदेश और बिहार की घटनाओं ने। ऐसा इसलिए कह रहें हैं, क्योंकि मध्यप्रदेश के […]

सामाजिक

बिजली विभाग का निजीकरण

पता नहीं क्यों, बिजली विभाग पर भाजपा की कुदृष्टि हमेशा से ही क्यों रही है? जब-जब भाजपा की सरकार आई है, बिजली विभाग को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। जब भाजपा के स्व. राम प्रकाश गुप्त यू.पी. के मुख्यमन्त्री थे और नरेश अग्रवाल ऊर्जा मन्त्री थे तो बिजली विभाग को चार टुकड़ों में बांट […]

सामाजिक

लेख– बच्चें ही नहीं, अगर परीक्षा प्रणाली भी फ़ेल होने लगे। तो शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की सख़्त दरकार।

यह देश के समक्ष सबसे बड़ी विडंबना नहीं तो क्या जिस दौर में अन्य क्षेत्रों में हम नित नए आयाम स्थापित करने की बात करते हैं। उस दौर में शिक्षा जो समाज निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, वह चरमरा गई है। आज छात्र ही फ़ेल नहीं हो रहें, परीक्षाएं भी फ़ेल साबित हो रहीं […]

कहानी

विदाई

आंगन में चारो ओर लाइटें लगा दी गई हैं। अब मंडप खड़ा करने की तैयारी चल रही थी जब चिंटू भागता हुआ आँगन में आकर खड़ा हो गया और दोनों हाथ कमर पर रखकर चिल्लाने लगा – “यहाँ उमा देवी कौन है? उमा देवी…उमा देवी….उमा देवी”। इतने में राकेश ने एक ज़ोर का चांटा उसकी […]