गीत/नवगीत

कौन आसिफा? कौन है गीता?

औरत की अस्मत भी देखो, दो धर्मों में डोल रही कौन आसिफा कौन है गीता, रह रह कर के बोल रही हमने भेद किया ही नही, जब भी नारी की बात उठी औरत बहन,बहू और बेटी, सब की एक आवाज उठी रैली निकली, नारे निकले, हिन्दू मुस्लिम साथ हुए नाम आसिफा भले था उसका,पर धर्म […]

कविता

गुरु

 (बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष) गुरु है, एक ऐसा स्रोत, जो ज्ञान का प्रकाश भी देता है और प्रेरणा भी, जो मार्ग भी दिखाता है और मंजिल पर भी पहुंचाता है. गुरु पवित्रता का प्रवाह है, गुरु नैतिकता का निर्वाह है. वह गुरु ही है, जो रचनात्मक क्रियाओं व अपने ज्ञान से, हमारे अन्तःकरण में आनंद […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हुस्न जो इश्क से रू-ब-रू हो गया ख़्वाब में जो दिखा हू-ब-हू हो गया एक पल को नज़र से नज़र क्या मिली सिलसिला चाहतों का शुरू हो गया कुछ कदम आपका साथ क्या मिल गया यूँ लगा मंजिलों का पता मिल गया टूटते हौसलों को यकीं मानिये ज़िन्दगी का नया हौसला मिल गया गर्द छँटने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यार बनके जो भूल जाते हैं। बाख़ुदा याद रोज आते हैं। कोई वादा नहीं हुआ फिर भी। राह में फूल हम बिछाते हैं। आख़िरी ख़्वाब आख़िरी चाहत। दफ़्न सीने में गुनगुनाते हैं। वो नदी की तरह दिखें सबको। सिसिकियाँ तह में जो दबाते हैं । ज़ीस्त ये इश्क़ में लगायी तो। कब्र तक पाँव लड़खड़ाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : भगवान क्यों है!

किया उसने मुझपे ये एहसान क्यों है? यही सोचकर दिल परेशान क्यों है? खिली रहती थी पहले होंठों पे उसके वो अब उस हँसी से ही अनजान क्यों है? गया ज़िंदगी से वो अपना न था तो लगे जिंदगी आज वीरान क्यों है? नहीं था जो क़िस्मत में वो ना मिला फिर, अभी भी जगा […]

कविता

वह पहला हिन्दुस्तान

मेरे देश के नौजवानो , शक्ति के दीवानो , क्यों देश में हिंसा फैली है क्यों काली हुई दिवाली है कहाँ गयी खुशहाली है हम हर इनसान से पूछते हैं वह पहला हिन्दुस्तान ढूँढ़ते हैं । लाचारी न थी कहीं  , बीमारी न थी कहीं खुशियों के डेरे थे  , बहारों के फेरे थे कौन […]

लघुकथा

आत्मज्ञान

उसने सुन रखा था- ”जब एक सच्चिदानंद स्वरूप सदगुरु व श्रद्धावान शिष्य का समन्वय होता है तो बेजोड़ ज्ञान का उदय होता है.” समस्या यह थी, कि ऐसा सच्चिदानंद स्वरूप सदगुरु कहां मिले? साथ ही उस जैसे मगध साम्राज्य में आतंक का पर्याय बन चुके अंगुलिमाल राक्षस का श्रद्धावान बनना कहां और कैसे सम्भव होता? […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

जिसे हालात ने मारा हो मुहब्बत कैसे वो कर ले, जो खुद टूटा सितारा हो मुहब्बत कैसे वो कर ले, ============================== सहारा देना पड़ता है इक दूजे को मुश्किल में, जो खुद ही बेसहारा हो मुहब्बत कैसे वो कर ले, ============================== जीने के लिए छत भी ज़रूरी होती है सर पर, जो खुद बेघर बेचारा […]

सामाजिक

विचारों की प्रकृति

🌼..विचारों की प्रकृति..🌼 अनंत रूपी प्रकृति जब अठखेलियां लेती हुई बलखाती हुई प्रत्यक्ष होती है, तो वैराग्य मन कवि निः स्वार्थ भाव से इन सब रूपों में अपने आप को सारगर्भित कर लेता है। वहीं स्वार्थपरक एवं पिद्दी आदम तमाशबीन बनकर रह जाता है। कवि के अनुसार प्रकृति के सारे अन्तरंगों का हिसाब संस्कृत के […]

कविता क्षणिका

हंसी खूबसूरती का ख़ज़ाना है

जब दिल हंसता हैतो पूरी दुनिया खिल उठती हैहंसी बस खूबसूरत होती हैबेइंतहा खूबसूरत होती हैहंसी का हर रंग चटख होता हैहंसी के हर रूप का एक अर्थ होता हैहंसीझांझर-सी झनकती हैपायल-सी खनकती हैसच्चा दोस्त हंसी की वजह बनता हैहंसी खूबसूरती का ख़ज़ाना है जो हरदम खुश रहता हैउसी ने यह राज जाना है.