दिल की बात

                                           विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष

दिल की बात सुनो प्रभु मेरे, दिल से तुझे सुनाऊं
दिल से दिल की बात सुनो तो, मैं तेरी हो जाऊं
दाता जय हो तेरी, दाता जय हो तेरी-

 

निर्मल कर दो मन मेरा, प्रभु बुद्धि निर्मल करना
निर्मल भाव हों निर्मल कर्म हों पड़े न दुःख से डरना
दाता जय हो तेरी, दाता जय हो तेरी-

 

कभी किसी का दिल न दुखाऊं सबमें तुझको पाऊं
कंठ मधुर हो वचन मधुर हों तेरी लीला गाऊं
दाता जय हो तेरी, दाता जय हो तेरी-

 

क्रोध से हरदम दूर रहूं हो शीतल तन-मन मेरा
प्रेम से तन-मन-जीवन में कण-कण में प्रम-बसेरा
दाता जय हो तेरी, दाता जय हो तेरी-

 

अपनी कृपा के योग्य बनादो हे परमेश्वर प्यारे
आनंद की बरखा कर दो बरसा दो रहमत-धारे
दाता जय हो तेरी, दाता जय हो तेरी-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।