जीत का जलवा

कल एक समाचार आया-

”CWG: साइना नेहवाल और पीवी सिंधु के बीच ‘फाइनल फाइट’, भारत का गोल्ड-सिल्वर पक्का”

यह ‘फाइनल फाइट’ भारत की ही दो शटलर्स के बीच होना बहुत ही आह्लाद का विषय है, वह भी कॉमनवेल्थ गेम्स में! यानी भारत का गोल्ड-सिल्वर पक्का. पक्का जी पक्का, बिलकुल पक्का और जीत के इसी जलवे के साथ हमें याद आई 2 अक्तूबर 1984 के दिन राजघाट पर हुए छात्रों के एक कवि सम्मेलन की.

यह कवि सम्मेलन दिल्ली राज्य स्तर पर होना था. क्षेत्रीय स्तर पर हम चारों-के-चारों पुरस्कार जीत चुके थे. पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा यानी प्रोत्साहन पुरस्कार भी. ख़ैर हम छात्राओं के साथ राजघाट के उस कवि सम्मेलन में उपस्थित हुए. इस कवि सम्मेलन की एक विशेषता थी, कि हर प्रतिभागी को कविता-पाठ से पहले उस कविता के लेखक का नाम भी बताना था. जब हमारी छात्राओं की बारी आई, तो हमारी चारों छात्राओं ने कवयित्री के तौर पर लीला तिवानी का नाम लिया. संयोग देखिए, कि यहां भी चारों पुरस्कार यानी पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा यानी प्रोत्साहन पुरस्कार हमारी छात्राओं के हिस्से में आए. तब मंच से उद्घोषित किया गया, कि ”अगर लीला तिवानी यहां मौजूद हों तो वे मंच पर आएं और अपनी एक कविता प्रस्तुत करें.”

अगले दिन प्रधानाचार्या जी ने चारों छात्राओं के साथ-साथ लीला तिवानी यानी हमें भी वहां से मिले जीत के प्रमाणपत्र प्रदान किए. आज फिर जीत का ऐसा ही जलवा गुरु पुलेला गोपीचंद के साथ होने वाला है, क्योंकि साइना नेहवाल और पीवी सिंधु दोनों के कोच एक ही हैं- गुरु पुलेला गोपीचंद.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।