कविताएं…

सन्ध्या का आगमन…
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अस्ताचल में
छिपता सूरज
तट की ओर
धीरे-धीरे खिसकती नाव
दिन भर की
थकी हुयी लहरें
शान्त हो
विश्राम करती हुयी
विलुप्त होता प्रकाश
गहराता अँधेरा
पशु-पक्षी-इंसान का
घर आने का मन
बस, ये ही तो है
संध्या का आगमन…
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सुन्दरता

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जितना सुन्दर
दिखता है वृक्ष
कहीं उससे भी ज्यादा
सुन्दर होती है
उसकी जड़
पर हाय !
हम देख नहीं सकते,
कर सकते हैं
उसे महसूस
वृक्ष की
वाह्य सुंदरता/दृढ़ता को देखकर
क्योंकि खोखली जड़ वाले वृक्ष,
सुंदर हुआ नहीं करते…
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लघु कविता
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नाविक
बिना नाव
आदमी
बिना गाँव
पेड़
बिना कतारें
भँवर
बिना हो धारे
ये सब
असुंदर से
लगते हैं
बिन मीठा जल
समुंदर से
लगते हैं…
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                             — विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’
                             कर्मचारी कालोनी,गंगापुर सिटी,
                                  स.मा. (राज.)322201
                                    मोबा : 9549165579
             ई-मेल :-
                       vishwambharvyagra@gmail.com
              निवेदन :- उक्त लघुकविताएं मेरी मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएं हैं |

परिचय - विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)322201