दूब के लाल फूल

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buy viagra online nz हिमगिरि के उत्तुंग शृङ्ग पर,
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http://champion4x4.com/?q=is-it-illegal-to-order-viagra-online मानव के चिर स्निग्ध हृदय में,
उठी हुई अभिलाषा जैसे.

अंगड़ाई लेती-सी धरा में,
फूटे जैसे प्रणय के अंकुर,
हरी-हरी इस दूब जाल से,
रक्तिम फूल खिले हैं ऐसे.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।