गुरु

जो ज्ञान का प्रकाश भी देता है और प्रेरणा भी,
जो मार्ग भी दिखाता है और मंजिल पर भी पहुंचाता है.

गुरु पवित्रता का प्रवाह है,
गुरु नैतिकता का निर्वाह है.

वह गुरु ही है,
जो रचनात्मक क्रियाओं व अपने ज्ञान से,
हमारे अन्तःकरण में आनंद की अनुभूति करवाता है,
इस आनंद की अनुभूति में आत्मसात किए गए विषय को,
शिष्य जीवन-पर्यंत नहीं भूलता है.

गुरु वह है
जो हमें सदबुद्धि दे,
हमें संसार में जीना सिखाए,
सामाजिक बाधाओं को सहजता से पार करने की कला सिखाए,
गूढ़-से-गूढ़ बातों को इस तरह समझाए,
कि वह बात हृदय में उतर जाए,
वही सच्चा गुरु है, वही आचार्य है,
जिसके सान्निध्य में जाने से,
जीवन की दिशा व दशा दोनों बदल जाएं.

गुरु वह,
जिसमें गरिमा है,
जो मनुष्य को भविष्य की चिंता से निकालकर,
वर्तमान में खड़े रहने की शिक्षा दे,
जो अभी अपनी जिंदगी को जीने,
भविष्य के बारे में सोचकर समय को,
बर्बाद न करने को प्रेरित करे,
जो जीवन का सत्य बताए,
अतीत पर या तो हम गर्व करते हैं,
या उसे याद करके पछताते हैं,
भविष्य को हम जानते नहीं है,
भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं,
दोनों दुखदायी हैं,
इन दोनों से छुड़ा सके.

गुरु है,
एक ऐसा स्रोत,
जो ज्ञान का प्रकाश भी देता है और प्रेरणा भी,
जो मार्ग भी दिखाता है और मंजिल पर भी पहुंचाता है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।