Monthly Archives: April 2018

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़िन्दगी है अगर और क्या चाहिए। हौसला बा-हुनर और क्या चाहिए।। डोर मजबूत हो प्यार विश्वास की। आज दौरे-सफर और क्या चाहिए।। आँधियों से गुज़ारिश थमें अब ज़रा। हों सलामत शज़र और क्या चाहिए।। सिर्फ़ तालीम...


  • अहसास

    अहसास

    ”चांदनी रात में अभिसार का मजा कुछ अलग ही है न!” नंदिनी के मौन ने कहा था. कितनी खुश थी नंदिनी! अब तक उसने सिर्फ साहित्य में अभिसार और अभिसारिका का आनंद लिया था, आज सचमुच...




  • मेरे पिता

    मेरे पिता

    आप मेरा एहसास आप ही मेरी आस हो मेरे सपनों का आप ही आकाश हो मेरा संबल मेरा आधार हो मेरे हर सुख की पहली पहचान हो मेरी थकन में, मेरी आस हो, मेरे हर सपने...


  • ये बचाने वाले लोग !

    ये बचाने वाले लोग !

    …कुछ लोग “बचाओ-बचाओ” के शोर के साथ मेरी ओर बढ़े आ रहे थे…उत्सुकतावश मैं अपने आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ देखने लगता हूँ ..!! लेकिन संकटापन्न की कोई स्थिति दिखाई नहीं देती …फिर भी किसी को बचाने के आपद्...