Monthly Archives: April 2018

  • शर्वरी धीरे चलो!!

    शर्वरी धीरे चलो!!

    (कल्पना कुछ ऐसी है- देर रात थक कर लौटे पति को पत्नी नहीं चाहती कि वह जल्दी उठे ऐसे में वह ‘तारों भरी रात(शर्वरी)’से जल्दी ना ढलने का निवेदन कर रही है!) शर्वरी! धीरे चलो कि मेरे...


  • गीत

    गीत

    पीड़ा पारावार हुई है, टूटे उर तंत्री के बंधन । समय व्याध तू गर रुक जाता ! तो यह निर्मम क्षण न आता । तूने युगल न तोड़ा होता – तन्हा क्रौंच न अश्रु बहाता ।...



  • स्‍मार्टफोन

    स्‍मार्टफोन

    ”बबीता, आज आपका बेटा स्कूल क्यों नहीं आया? बिट्टू बता रहा था.” नीता ने बबीता से फोन पर पूछा. ”हां नीता, उसे पेन-पेंसिल पकड़ने में दिक्‍कत हो रही है, सो डॉक्टर को दिखाने गई थी.” ”डॉक्टर...

  • कविता – धरती राजस्थान की

    कविता – धरती राजस्थान की

    कण कण जिसका यश गाता वह धरती राजस्थान की….. राणा प्रताप से स्वाभिमानी पन्ना जैसी स्वामिभक्त यहाँ भामाशाह से हुए दानी जहाँ वह धरती राजस्थान की….. पद्मनी सी सुंदर महारानी आन बान की जिसने ठानी मीराँ...

  • समकालीन  कविताएँ

    समकालीन कविताएँ

    (1) क्षुधा ——- जो कभी भूखा न रहा वह क्या जाने ऐंठती आँतों का दर्द बंद होती आँखों का अंधेरा और क़दमों की लड़खड़ाहट …और वैसे भी वातानुकूलित में बैठकर क्षुधा का अर्थ नहीं समझा जा...