Monthly Archives: May 2018

  • गठबंधन की गाँठ

    गठबंधन की गाँठ

    गठबंधन के बिना यह दुनियाँ नहीं चल सकती, ऐसा मैं नहीं दुनियादारी कहती है..यहाँ कहाँ नहीं है गठबंधन! कोई बताए..? यह गठबंधन बिलावजह नहीं होता..हर कोई, या तो अपने फायदे के लिए, या किसी को जलाने...

  • तुमसे कुछ कहना है कब से बटोर रही हूँ शब्दों को एक पहाड़ सा बन गया है शब्दों का अब मुहिम है,छंटनी की… उलीच रही हूँ शब्दों को कि मिल जाये कोई ऐसा शब्द जो ज़ाहिर...

  • मुक्तक….

    मुक्तक….

      चरागों की पनाहों में मुहब्बत साँस भरती है। सितारों की निगाहों में अँधेरी रात चुभती है। ये माना है नही आसां मुहब्बत राह पर चलना- कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है। ________अनहद...


  • जन-जन का सहकार-3

    जन-जन का सहकार-3

    जन-जन का जब हो सहकार, मिल सकता आनंद-उपहार. साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना  एक अकेला थक जायेगा मिल कर बोझ उठाना  साथी हाथ बढ़ाना———- इसी हाथ बढ़ाने का दूसरा नाम है- जन-जन का सहकार. जन-जन...


  • संतुष्टि…..

    संतुष्टि…..

    संतुष्टि सुनो! व्याप्त है अगर.. तुम्हारे हृदय में मेरे प्रेम का सुर्ख गुलाबी रंग तो तुम जरूर महसूस करोगे मेरे मन के अनकहे जज्बात कहते हैं.. प्रेम! मौन को दर्शाता है और खामोशी से दिल की...

  • माँ

    माँ

    माँ ममता की विशाल वट वृक्ष है माँ का हृदय असीम है माँ के आगोश में विश्वास है माँ के छाया में सपने हैं माँ की छाती में अमृत है माँ के लाड़ में जीवन है...


  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    दिल से दिल की लगी छुपाने के लिए ज़ख़्म ए दिल छुप छुप नहीँ धोता कोई । ख्वाब ने नींद को खुलने न दिया शायद वर्ना इस तरह इस कदर नहीँ सोता कोई। जब तलक दिल...