ग़ज़ल

सटीक बात की, आक्षेप बाँधनू क्या है
ये बातचीत में खरसान बैर बू क्या है?
नया ज़माना नया है तमाम पैराहन
अगर पहन लिया वो वस्त्र, फ़ालतू क्या है |
हसीन मानता हूँ मैं उसे, नहीं शोले
नजाकतें जहाँ है इश्क, तुन्दखू क्या है |
किया करार बहुत आम से चुनावों में
वजीर बनके कही रहबरी, कि तू क्या है ?
हो वुध्दिमान मिला राज, अब करो कुछ भी
उलट पलट करो खुद आप, गुफ्तगू क्या है |
ये कर्ण फूल, गले हार, हाथ में कंगन
पहन लिया सभी कुछ, और आरजू क्या है ?
जला जो आग से कश्मीर, भष्म में है क्या
वो खंडहर में बची लाश की जुस्तजू क्या है ?
सभी को है पता मंत्री बना अभी “काली”
नहीं तो देश में उसकी भी आबरू क्या है |
शब्दार्थ :-
बाँधनू – मनगढ़ंत , खरसान –तेज , बू –गंध
तुन्दखू-गुस्सैल;तेज मिज़ाज़, जुस्तजू –खोज, गंवेषणा
मौलिक व अप्रकाशित
कालीपद ‘प्रसाद’

परिचय - कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अंधरे से उजाले की ओर" मुक्तक एवं काव्य संग्रह २०१५ में प्रकाषित | साझा गीतिका संग्रह "गीतिका है मनोरम सभी के लिए " २०१६ | उपन्यास "कल्याणी माँ " २०१६ में प्रकाशित |