छंद : मधुशाला

विधान : 16/14=30,अंत 112/22 प्रथम, द्वितीय, व चतुर्थ चरण तुकांत,तृतीय चरण स्वतंत्र

 

आज सभी जन हुए लालची,छल कुदरत से करते हैं ।
छल  कुदरत  को  बाद स्वयं ही,मरने से भी डरते हैं ।
भूल  रहे  है  लोग  हुआ  छल,ये उनके ही जीवन से ।
पर्वत, वृक्ष , नीर  दोहन  कर,नित्य मृत्यु को वरते हैं ।

Madhushaala chhand

परिचय - नवीन श्रोत्रिय

नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष" श्रोत्रिय निवास, भगवती कॉलोनी बयाना (भरतपुर)राजस्थान 321401 +91 84 4008-4006​