कविता

बेरोजगारी का स्वरुप बिकराल होगा

 

हैवानियत की चश्मा जिनके आँखों पर होगा
उन्ही लोगो के वजह से मानव शर्मसार होगा
भारत में बढती आबादी का स्वरूप बिकराल होगा
तो बेरोजगारी की हालत और भी बिकराल होगा।

आज जिधर भी देखिये बेरोजगारी ही बेरोजगारी है
नमक दाल रोटी चालाने में भी मारा मारी है
यही हालात रही तो मौसम भी भयावह होगा
भारत में बढ़ती आबादी का स्वरूप बिकराल होगा।

जिंदगी में गम खाकर पिसते है सत्ता के गलियारों में
वोट बैंक की खातिर नेता गीर जाते है अँधियारो में
यही हालत रही तो चारो तरफ भयानक अंधकार होगा
भारत में बढ़ती आबादी का स्वरूप बिकराल होगा।

सत्ता में शिक्षा मसले पर अघोषित युद्ध चल रहा है
सता के गलियारों में पूरा नेता मौन साध रहा है
यही हालात रही तो गरीबों की शिक्षा अंधकार होगा
भारत में बढ़ती आबादी का स्वरुप बिकराल होगा।

रचनाकार- रंजन कुमार प्रसाद ( माध्यमिक शिक्षक)

परिचय - रंजन कुमार प्रसाद

माध्यमिक शिक्षक उत्क्रमित हाइस्कूल तोरनी,करगहर,रोहतास, बिहार, पता- ग्राम-सकरी,पोस्ट-कुदरा, जिला-कैमूर(भभुआ) बिहार, दूरभाष-9931580972 , ranjangupta9931@gmail.com

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