मां का नाम है अनमोल

मां का नाम है अनमोल, मां का काम है अनमोल 
मां की गोद है नूरानी, मां का धाम है अनमोल-

सीख मिली मां से ही मुझको, इंसां बन रहने की
हिम्मत मां से ही पाई है, सच को सच कहने की
मां के मीठे-मीठे बोल, मन में मिश्री देते घोल-मां की गोद है नूरानी—–

मां के प्यार ने हरदम मुझको, गोद में ले हर्षाया
मां की डांट ने भी मुझको है, नूतन पथ दिखलाया
देती सब भेदों को खोल, कहती तनिक न बेटा डोल-मां की गोद है नूरानी—–

मां तेरी सूरत ही मुझको, मेरी पहचान बताती
तेरी पूजा ही मां मेरी, पूजा है बन जाती 
तेरे बिन मैं ज़ीरो गोल, तेरे मन में न कोई झोल- मां की गोद है नूरानी—–

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।