त्रिशंकु सदन -सांझा सरकार

देश की राजनीति के बारे में अपने विचार रख रहा हूँ,

हमारा देश बहुभाषायी, बहु प्रांतीय और धर्मनिरपेक्ष है ,जात पात के नाम पर काफी बंटा हुआ है, हम कहते हैं की यह अनेकता में एकता का प्रतीक है, होना भी चाहिए पर , लोक तंत्र होने के कारण जनता ही सदन को चुनती है, और राजनीति में वोट बैंक का वर्चस्व बना रहता है, हर राजनैतिक पार्टी सत्ता में आना चाहती है पर सत्ता बहुमत के आधार पर  ही मिल पाती है,  इसीलिए चुनाव उम्मीदवार का चयन करते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है,

क्यों न यहाँ भी अनेकता में एकता का उदाहरण दिया जाये. अगर हर पार्टी का उद्देश्य देश और जनहित में काम करना है  तो मिल ज़ुल कर भी कर सकते हैं, अर्थात टीम वर्क.

जब जब लोक सभा या विधान सभा में चुनाव के बाद त्रिशंकु स्तिथि उत्पन्न हो जाती है तो मेरे विचार से वहां एक नए फॉर्मूले के अनुसार सरकार बननी चाहिए —

जिस दल के पास अधिकतम सीट हो , प्रधान मंत्री /मुख्य मंत्री उसी दल का होना चाहिए,

1.हर दल के चुने हुए सदस्यों के १०% सदस्यों को मंत्री पद दिया जाये,

2.विभाग का चयन प्रधान मंत्री /मुख्य मंत्री का अधिकार क्षेत्र  रहे ,

3.मंत्रियों की कुल संख्या कुल सदस्यों के १०% से अधिक नहीं होनी चाहिए,

4.मंत्री पद पाने के लिए उस दल की कम से कम १०% सीट होनी चाहिए,

5.हमारा भारत  विभिन्ता में एकता  का देश  है,   इस   से हर दल को अपने कार्यक्षेत्र  में काम  करके  दिखiने  का  मौका  मिलेगा . सदन  की कार्यवाही  भी  सुचारु  रूप  से चलेगी, ऐसा मेरा मानना है . अब यह संभव है और कैसे हो सकता है यह तो सविधान के विशेषज्ञ ही बता सकते हैं,

आप भी अपने सुझाव दे सकते है,

— जय प्रकाश भाटिया 

परिचय - जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845