पिता की गोद

काश मैं फिर से छोटी बच्ची बन जाती और तुम्हारी गोद में खेल पाती ।
झूल जाती तुम्हारे कंधों पर तुम्हारे बालों से
छेड़ पाती ।

न होती कोई कमी कभी भी प्यार की दुलार की
तुम्हारी एक डांट से पहले की तरह सहम जाती ।

उदास होती कभी तो पूछ्ते मुझसे प्यार भरी नजरों से
तुम्हारे लाड़ को हीरे मोतियों से तोल पाती।

प्यार का गहरा सागर होता तुम्हारी बाहों में
जिंदगी के सारे गम लहरों में डूबकर धो पाती ।

सीख जाती तुम्हीं से जिंदगी की टेडी मेड़ी चालें ,
काश जिंदगी शतरंज के मोहरे न बनी होती ।

जिंदगी जीने के लिए जरूरी हैं कागज के कुछ फूल
काश तेरे दामन में अपने आंसुओं को संजो पाती.

वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन