सुर संगम (नर्सरी गीत नाटिका)

प्रस्तुतकर्त्ता-
छोटा-सा खरगोश नताशा,
पेश हुआ ले एक तमाशा,
सुनो-सुनो हे प्रिय श्रोताओं,
प्रिय बहिनों और प्रिय भ्राताओं.

खरगोश-
आज खुशी का दिन है आया,
जंगल में मंगल है छाया,
ताल-वाद्य का होगा संगम,
सबका ही दिल बहलाएंगे हम.
सबसे पहले सुनलो बाजा,
पेश करे खरगोश नताशा,
गSSS ग सा ग म नी प,
गSSS ग रे सॉ रे नि सा.

प्रस्तुतकर्त्ता-
हाथी जी ले ढोल ढमा-ढम,
आए करते ढम ढमा-ढम. (ढोल की आवाज)
ढम ढमा ढम, ढम ढमा ढम,
ढम ढमा ढम, ढम ढमा ढम.

बंदर भैया घुंघरू पहने,
करते आए छम छमा छम. (घुंघरू की आवाज)
छम छमा छम, छम छमा छम,
छम छमा छम, छम छमा छम.

खंजरी लेकर मुर्गा आया,
ता धिन ता धिन करता आया. (खंजरी की आवाज)
धिन धिना धिन, धिन धिना धिन,
ता धिन ता धिन, धिन धिना धिन.

भोंपू शेर बजाएगा अब,
पर वह तो दिख रहा नहीं,
अब कैसे होगा सुर संगम?
भोंपू की जब तान नहीं.

सब जानवर-
सोचो-सोचो अब क्या होगा?
कैसे होगा काम अहा!
बंदर-
जरा रुको मैं जाकर जल्दी,
अभी शेर को बुला रहा.

बंदर वापिस आकर चिंता से-
शेर तो है बीमार बहुत ही
रात से उसको चढ़ा बुखार
खरगोश-
भोंपू कौन बजाएगा अब,
अब तो सुर संगम बेकार!

हाथी-
चिंता क्यों करते हो भैया,
भोंपू भी मुझको पकड़ा दो,
भोंपू सूंड बजाएगी और
ढोल करेगा ढम ढमा ढम.

सभी वाद्य एक साथ बजने के बाद प्रस्तुतकर्त्ता-
भोंपू भी क्या खूब बजा है,
सारे वाद्य बजे हैं सुर में,
अब तो सारे जानवर खुश हैं,
सीटी बजा रहे हैं सुर में.

चीता-
चीता माला लाकर बोला,
हाथी भैया खूब शाबाश,
आज न तुम होते तो होता,
कार्यक्रम का सत्यानाश.

सब जानवर-
हाथी दादा जिंदाबाद,
जिंदाबाद भाई जिंदाबाद.

सब जानवर अपने-अपने बाजे बजाते हुए पंक्तिबद्ध जाते हैं.
पटाक्षेप.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।